नसीमखान
सांची,,
सांची जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत नरखेडा के जंगलों में बीते कुछ दिनों से शेरों की मौजूदगी ने क्षेत्र में दहशत का माहौल पैदा कर दिया है। ग्रामीणों के अनुसार, करीब तीन से चार शेर गांव के समीप जंगल में डेरा डाले हुए हैं। इससे पहले भी कई पालतू पशु इन जंगली जानवरों का शिकार बन चुके हैं, लेकिन वन विभाग की ओर से अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि वन विभाग की उदासीनता के कारण पूरे क्षेत्र में भय का माहौल है। यह इलाका कृषि प्रधान है, और इन दिनों किसान खेतों की जुताई और अगली फसलों की तैयारी में व्यस्त हैं। दिन-रात खेतों में काम कर रहे किसानों को जंगली जानवरों से जान का खतरा बना हुआ है।
एक ग्रामीण ने बताया, “हमारे बच्चे और महिलाएं भी जंगल के समीप खेतों में कार्य करने जाती हैं, लेकिन अब डर के कारण खेत जाना मुश्किल हो गया है। जब तक कोई बड़ी जनहानि नहीं हो जाती, तब तक शायद वन विभाग जागेगा।”
यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पूर्व गुलगांव क्षेत्र में एक तेंदुआ गांव के समीप आकर कटीले तारों की बाड़ में फंस गया था, जिससे उसकी दर्दनाक मौत हो गई थी। तब भी वन विभाग के कर्मचारी घटनास्थल पर समय पर नहीं पहुंचे और बाद में केवल औपचारिकता निभा कर मामले की खाना पूर्ति कर इतिश्री कर ली गई ।परन्तु इस घटना से भी वनविभाग सबक नहीं ले सका ।तथा यहां तैनात अधिकारी कर्मचारी को न तो वन्य प्राणियों की सुरक्षा की चिंता हो पा रही हैं न ही ग्रामीण क्षेत्र के लोगो की सुरक्षा के लिए ही कोई योजना तैयार की गई है। जबकि ग्रामीणों द्वारा पहाड़ी पर शैरो का एक वीडियो भी वायरल हो रहा है ।
इन घटनाओं से यह स्पष्ट होता है कि वन्य प्राणियों की सुरक्षा और ग्रामीणों की सुरक्षा दोनों ही उपेक्षा का शिकार हैं। वन विभाग को चाहिए कि वह इस गंभीर समस्या पर त्वरित और प्रभावी कार्रवाई करे। ग्रामीणों ने मांग की है कि नरखेडा सहित आसपास के क्षेत्रों में वन्य प्राणियों की निगरानी हेतु विशेष गश्त और सुरक्षा उपाय किए जाएं।
यदि समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए, तो यह लापरवाही किसी बड़ी जनहानि का कारण बन सकती है।






