सांची में मधुमक्खियों के हमले से मची अफरा-तफरी, कई लोग घायल — सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

नसीमखान
सांची,,,
विश्व प्रसिद्ध ऐतिहासिक स्थल सांची में शनिवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई जब मुख्य चौराहे पर अचानक मधुमक्खियों के झुंड ने राहगीरों और दुकानदारों पर हमला कर दिया। इस हमले में कई लोग घायल हो गए। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि लोग जहाँ-तहाँ सिर छुपाकर बैठने और भागने को मजबूर हो गए।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मधुमक्खियों के इस हमले में कई लोग घायल हुए हैं। कुछ लोगों को स्थानीय लोगों द्वारा बताया जा रहा है कि हमले के समय चौराहे पर आमजन के अलावा छोटे-मोटे व्यवसायी और राहगीर बड़ी संख्या में मौजूद थे। मधुमक्खियाँ झुंड में पूरे क्षेत्र में मंडराने लगीं और लोगों को निशाना बनाने लगीं।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब सांची में मधुमक्खियों का आतंक देखने को मिला है। पूर्व में भी इस प्रकार की घटनाएँ हो चुकी हैं। एक बार शमशान घाट पर शव का अंतिम संस्कार करते समय मधुमक्खियों के हमले के चलते कई लोगों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था। इतना ही नहीं, एक बार जब एक राष्ट्रपति ऐतिहासिक स्मारकों के दर्शन के लिए सांची पहुंचे थे, उस समय भी मधुमक्खियों के झुंड ने हमला कर दिया था, जिससे भारी अफरा-तफरी मच गई थी।
सुरक्षा के पर्याप्त इंतज़ाम नहीं।
यहाँ यह उल्लेखनीय है कि सांची एक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध पर्यटन स्थल है, जहाँ प्रतिवर्ष हजारों देशी-विदेशी पर्यटक भ्रमण के लिए आते हैं। इसके बावजूद, स्थानीय प्रशासन और वन विभाग इस प्रकार के प्राकृतिक जीवों से सुरक्षा के लिए कोई प्रभावी उपाय नहीं कर पाया है।
स्तूप परिसर सहित नगर के विभिन्न हिस्सों में अनेक पेड़ों पर मधुमक्खियों के छत्ते खुलेआम दिखाई देते हैं। कई बार मधुमक्खियों के हमलों की घटनाएँ सामने आने के बावजूद, न तो छत्तों को हटाने की कोई ठोस योजना बनी है और न ही सुरक्षा के दृष्टिकोण से सतर्कता बरती जा रही है। इससे बच्चों और बुजुर्गों के लिए स्थिति और भी खतरनाक हो जाती है।
कुत्तों और बंदरों से भी परेशान नगरवासी।
सिर्फ मधुमक्खियों का आतंक ही नहीं, नगर में आवारा कुत्तों और उत्पाती बंदरों की बढ़ती संख्या भी लोगों के लिए बड़ी समस्या बनती जा रही है। आवारा कुत्ते अक्सर राहगीरों और दोपहिया वाहनों के पीछे दौड़ते देखे जाते हैं। कई सरकारी दफ्तरों के परिसरों में भी इन कुत्तों ने डेरा जमा रखा है, जिससे कर्मचारियों और आगंतुकों में भय का माहौल बना रहता है।
इसी प्रकार, नगर भर में बंदरों की संख्या भी तेजी से बढ़ी है। ये बंदर न केवल घरों में घुसकर उत्पात मचाते हैं, बल्कि स्तूप परिसर और अन्य सार्वजनिक स्थलों पर भी उछल-कूद कर पर्यटकों को भयभीत करते रहते हैं।
प्रशासन की निष्क्रियता पर सवाल।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि बार-बार इन समस्याओं को उठाने के बावजूद न तो नगर प्रशासन, न ही वन विभाग और न ही जिला प्रशासन इस दिशा में कोई ठोस कदम उठा रहा है। आज हुई मधुमक्खियों की घटना इसका ताजा उदाहरण है। यदि शीघ्र उचित कार्रवाई नहीं की गई, तो भविष्य में बड़ी दुर्घटनाओं की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है।

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