,जांजगीर चांपा छत्तीसगढ़ प्रदेश सवादातां दिलेश्वर चौहान ।
इस दुख की घड़ी में मुख्यमंत्री ने उनके मृत शरीर पर पुष्प अर्जित किया।
मुख्यमंत्री ने श्रद्धांजलि अर्पित कर कहा कि हास्य कविता के विश्व महानायक को भुलाया नहीं जा सकता ,उनकी क्षति कि भरपाई नहींकि जा सकती।
डॉ सुरेंद्र दुबे को वर्ष 2010 में भारत सरकार द्वारा पद्मश्री से सम्मानित किया गया ,यह सम्मान उनके साहित्य योगदान सामाजिक सरोकार और जन भावनाओं से जुड़े हास्य व्यंग को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता दिलाने का प्रतीक था ।
उनके निधन की खबर कवि समाज मीडिया जगत, और आम जनता में शोक की लहर दौड़ गई।
डॉक्टर सुरेंद्र दुबे जी आयुर्वेद के डॉक्टर थे, और हास्य व्यंग्य कविता के माध्यम से जीवन के उन रूपों पर प्रकाश डालते थे।
जिंदगी और हालात को बड़ी सादगी से एहसास करा देते थे । दूरदर्शन टीवी चैनल के माध्यम से होने वाले कवि सम्मेलन मे उनकी सुरसुरी ससुर की कविताएं केवल हंसी मजाक नहीं बल्कि सामाजिक राजनीतिक मंचों पर भी कटाक्ष करती है ।
जीवन के गंभीर तत्वों पर विश्लेषण करता था लोग हंसते-हंसते उसे जीवन की सच्चाई को भी ग्रहण कर लेते थे
उनके द्वारा पांच पुस्तक लिखी गई थी कवि कुमार विश्वास सुरेंद्र शर्मा सहित अनेक साहित्यकारों रचनाकारों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की






