सांची में जर्जर भवनों से बेखबर प्रशासन, अनहोनी का कर रहा इंतजार।

नसीमखान

सांची,,
विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल सांची, जहां हजारों देशी-विदेशी पर्यटक प्रतिवर्ष पहुंचते हैं, उसी नगर में आज जर्जर और खंडहर हो चुके सरकारी भवन हादसों को दावत दे रहे हैं। प्रशासन द्वारा ‘अनुपयोगी’ घोषित किए जा चुके इन भवनों की स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है।
जानकारी के अनुसार, नगर में कई पुराने शासकीय भवन अब उपयोग की स्थिति में नहीं हैं। इनमें जनपद पंचायत कार्यालय के भवन, पुराना थाना भवन, तथा पुराना तहसील कार्यालय प्रमुख हैं। बावजूद इसके, इन भवनों का उपयोग लगातार जारी है। कहीं इन्हें पार्किंग स्थल बनाया गया है तो कहीं आराम गाह या कार्यालय के रूप में प्रयोग किया जा रहा है। इतना ही नहीं ऐसे भवनों में आवारा फिरने वाले पशुओ का भी जमा्वडा लग जाता है इसके साथ ही तेज धूप अथवा बारिश से बचाव के लिए भी लोग इन जर्जर भवनों का सहारा लेते दिखाई पड जाते है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि प्रशासन ने इन भवनों को भले ही अनुपयोगी घोषित कर दिया हो, लेकिन इनके उपयोग पर न तो कोई रोक है और न ही सुरक्षा इंतजाम। कई भवनों में दिनभर लोगों की आवाजाही बनी रहती है और कुछ जगहों पर वाहनों की पार्किंग भी हो रही है। इन भवनों के खंडहर होते ढांचे कभी भी गिर सकते हैं, जिससे जनहानि की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
कुछ भवन अतिक्रमण की चपेट में भी आ चुके हैं। हैरानी की बात यह है कि जिन भवनों को स्वयं प्रशासन ने अनुपयोगी करार दिया है, उनके उपयोग पर रोक लगाने में भी वह असफल रहा है। ना तो चेतावनी बोर्ड लगाए गए हैं, ना ही कोई बैरिकेडिंग।
नगरवासियों ने कई बार इन भवनों को गिराने और स्थल को सुरक्षित करने की मांग की है, परंतु अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
सवाल यह उठता है कि क्या प्रशासन किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहा है? यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई, तो इन जर्जर भवनों के कारण सांची की पहचान पर भी प्रश्नचिन्ह लग सकता है और जनहानि की आशंका भी बनी रहेगी।
इस मामले में इनका कहना है।।
हम सम्बंधित विभागों को पत्र के माध्यम से सूचित कर रहे हैं कि इन अनुपयोगी भवनों के उपयोग पर रोक लगाई जाये अथवा ढहाने की प्रक्रिया की जाये ।नियति साहू अतिरिक्त तहसीलदार सांची

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