नसीमखान
सांची,,बादलों की हल्की फुहार, हवा में मिट्टी की भीनी महक और चारों ओर फैली हरी चादर… ऐसे में अगर स्तूप परिसर में कदम रख दें तो लगेगा मानो प्रकृति ने अपना सबसे सुंदर चित्र यहीं उकेरा हो। बरसात के इन दिनों में परिसर के हर कोने में जीवन जैसे नाचने लगता है।
पेड़ों की डालियों पर बंदरों की उछलकूद, तालाबों में तैरती बत्तखों की कतार, इधर-उधर फुदकते खरगोश और आसमान में मंडराते कबूतर — हर जीव यहां अपनी मस्ती में खोया है। लेकिन इन सबके बीच जो सबसे ज्यादा दिल चुरा लेता है, वह है राष्ट्रीय पक्षी मोर। जैसे ही बादल गरजते हैं, मोर अपने पंख मोतियों-सी बूंदों में भीगने के लिए फैला देते हैं और गोल-गोल घूमते हुए नाचने लगते हैं।
कभी एक-दो मोर, तो कभी पूरा झुंड… उनकी मटकती चाल और फैले हुए रंगीन पंखों का जादू ऐसा है कि हर पर्यटक ठिठक कर बस उन्हें निहारता रह जाता है। बच्चों की आंखों में हैरानी, बुज़ुर्गों के चेहरों पर मुस्कान और युवाओं के मोबाइल कैमरों में कैद होते अनगिनत लम्हे — यह सब मिलकर इस दृश्य को यादगार बना देते हैं।
बरसात में हरियाली से लिपटा यह परिसर और मोरों का यह अद्भुत नृत्य, मानो कहता हो — “अगर स्वर्ग कहीं है, तो वह यहीं है।”






