नसीमखान
सांची,,नगर में जल निकासी व्यवस्था सुधारने के लिए चल रहे नाला निर्माण कार्य में लापरवाही उजागर हुई है। निर्माण एजेंसी ने सिविल अस्पताल की मजबूत दीवार को आनन-फानन में तो तोड़ डाला, लेकिन पुनर्निर्माण की सुध आज तक नहीं ली। परिणामस्वरूप अस्पताल का परिसर अब पूरी तरह असुरक्षित हो गया है और आवारा पशुओं की आवाजाही ने मरीजों व स्टाफ की परेशानी बढ़ा दी है।
सूत्रों के अनुसार, दीवार तोड़ते समय निर्माण एजेंसी ने आश्वासन दिया था कि नाला निर्माण पूरा होने के बाद अस्पताल की दीवार का पुनर्निर्माण कर दिया जाएगा। मगर बरसात का मौसम शुरू होने से निर्माण कार्य की रफ्तार थम गई और अस्पताल की दीवार टूटी ही पड़ी है। इससे अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो गई है।
यहां उल्लेखनीय है कि करोड़ों की लागत से बने सिविल अस्पताल भवन की सुरक्षा दीवार का यूं टूट जाना गंभीर लापरवाही का उदाहरण है। दूसरी ओर करोड़ों की लागत से हो रहा नाला निर्माण भी अधूरा पड़ा है। तेज बारिश में पानी अभी भी सड़कों पर बहता नज़र आ रहा है, जबकि दीवार टूटी रहने से मरीज और उनके परिजन भय के माहौल में अस्पताल आने को मजबूर हैं।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जब दुकानों के सामने नाला बंद होने से एजेंसी ने तुरंत राहत दी, तो अस्पताल की दीवार का पुनर्निर्माण अब तक क्यों नहीं किया गया? क्या मरीजों की सुरक्षा दुकानदारों की दुकान से भी कम महत्व रखती है?
अस्पताल प्रशासन की चुप्पी भी सवाल खड़े कर रही है। जिम्मेदार अधिकारियों को चाहिए कि वे तुरंत निर्माण एजेंसी से टूटी दीवार का पुनर्निर्माण कराएं और अस्पताल की सुरक्षा सुनिश्चित करें। जनता अब इंतजार में है कि आखिर कब तक निर्माण एजेंसी और अस्पताल प्रशासन नींद से जागेंगे और मरीजों की सुरक्षा को प्राथमिकता देंगे।






