नसीमखान
सांची। श्री शीतलनाथ दिगंबर जैन मंदिर में चल रहे पर्युषण महापर्व का आयोजन भारी हर्षोल्लास और धर्ममय वातावरण में संपन्न हो रहा है। सांगानेर (राजस्थान) से पधारे संभव भैया जी के सानिध्य में प्रतिदिन प्रातः 7:30 बजे मंगलाष्टक, अभिषेक एवं शांतिधारा का आयोजन किया जाता है। दोपहर में समाज के धर्मावलंबियों द्वारा विधान और रात्रि में आरती एवं प्रवचनों का कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है।
महापर्व के दूसरे दिन संभव भैया जी ने उत्तम मार्दव धर्म पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मद के आते ही धर्म चला जाता है। मनुष्य को आत्म-प्रशंसा और दूसरों की निंदा से बचना चाहिए तथा मन की कठोरता नहीं रखनी चाहिए।
यह महापर्व 26 अगस्त से 6 सितंबर तक चलेगा। इस दौरान स्थानीय जैन समाज के सुनील जैन, राजेंद्र जैन, राजमल जैन, विजय जैन, गोपाल जैन, मम्मा आनंद जैन, संदीप जैन, गोरेलाल जैन, पदम जैन, अंकित जैन, हिमांशु जैन, राजू जैन, धर्मेंद्र जैन, सोनू जैन, अशोक जैन, सुशील जैन, सत्यम जैन, विक्की जैन सहित अनेक धर्मबंधु प्रतिदिन श्रद्धाभाव से उपस्थित हो रहे हैं।
उत्तम मार्दव धर्म का संदेश
संभव भैया जी ने कहा कि अहंकार और मद के आते ही धर्म से दूरी बढ़ जाती है। मनुष्य को आत्म-प्रशंसा और दूसरों की निंदा से बचना चाहिए। मन की कठोरता छोड़कर नम्रता और सरलता अपनाने से ही जीवन में सच्ची शांति प्राप्त होती है।






