नसीमखान सांची
सांची,,, देव उठनी ग्यारस (प्रबोधिनी एकादशी) के पावन अवसर पर शनिवार को सांची नगर में श्रद्धा और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। मान्यता है कि चातुर्मास के चार माह तक योगनिद्रा में रहने के बाद इस दिन भगवान श्रीहरि विष्णु जागते हैं, जिसके साथ ही विवाह, गृहप्रवेश और अन्य मांगलिक कार्यों का शुभारंभ होता है।
प्रातःकाल से ही मंदिरों में पूजन-अर्चन का क्रम आरंभ हो गया। विशेष रूप से चौराहे स्थित शिवमंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। भक्तों ने हर हर महादेव और जय श्रीहरि के जयघोष के साथ जलाभिषेक, दीपदान और भजन-कीर्तन किए। मंदिर परिसर दीपों और फूलों से सुसज्जित रहा, वहीं महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में भगवान के दर्शन हेतु मंदिरों में पहुची ।
नगर के विभिन्न वार्डों और मोहल्लों में भी तुलसी विवाह की परंपरा पूरे विधि-विधान से निभाई गई। महिलाओं ने मंगल गीत गाते हुए तुलसी माता का श्रृंगार किया और शालिग्राम भगवान के साथ विवाह संस्कार संपन्न किए।
दिनभर आसमान में बादल छाए रहे और हल्की शीतलहर बहती रही, परंतु ठंड के बावजूद भक्तों का उत्साह और श्रद्धा अडिग रही। शाम को आरती और दीपोत्सव के दौरान सांची नगर दीपमालाओं से आलोकित हो उठा।
स्थानीय पुजारियों ने बताया कि देव उठनी ग्यारस से ही मांगलिक कार्यों की शुरुआत होती है, अतः इस दिन व्रत, दान और भगवान विष्णु का स्मरण करने से घर-परिवार में सुख-समृद्धि आती है।
श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने नगर में व्यवस्था बनाए रखी, जिससे पर्व शांति और सौहार्द के साथ संपन्न हुआ।






