सांची में 29–30 नवम्बर को महाबोधि महोत्सव: बौद्ध धरोहर की गोद में सांस्कृतिक समागम।श्रीलंका लोकनृत्य, बुद्ध नाटिका, भक्ति गायन और अखिल भारतीय कवि सम्मेलन से जागेगी सांची की प्राचीन बौद्ध आभा।

नसीमखान सांची

सांची,,,
जिले की विश्वप्रसिद्ध पर्यटन नगरी सांची, जो भारत की प्राचीनतम बौद्ध धरोहरों का अमूल्य केंद्र माना जाता है, यहां 29 एवं 30 नवम्बर 2025 को दो दिवसीय महाबोधि महोत्सव आयोजित किया जा रहा है। मप्र शासन के संस्कृति विभाग द्वारा जिला प्रशासन के सहयोग से आयोजित यह भव्य आयोजन बुद्ध जम्बूद्वीप पार्क (पुराना विश्राम परिसर) में होगा, जहां विविध सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ सांची की ऐतिहासिक गरिमा में नई आभा भरेंगी।
सांची अपनी 2500 वर्ष पुरानी बौद्ध विरासत, महान स्तोूप क्रमांक-1, अशोक कालीन धर्मचक्र, और समूची मानव सभ्यता को शांति का संदेश देने वाले अशोक स्तंभ के लिए विश्वभर में जाना जाता है। यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर स्थल घोषित सांची सदियों से बौद्ध धर्म, करुणा और अहिंसा के उपदेशों की जीवंत प्रतीक रही है। इसी आध्यात्मिक पृष्ठभूमि में आयोजित होने वाला महाबोधि महोत्सव न केवल सांस्कृतिक विविधता का उत्सव है, बल्कि सांची की ऐतिहासिक आत्मा को फिर से अनुभव करने का अवसर भी प्रदान करेगा।
महोत्सव के कार्यक्रम
पहला दिवस – 29 नवम्बर:
श्रीलंका के लोकनृत्य एवं गीत
भोपाल के कलाकारों द्वारा पंचशील की नृत्य-गायन प्रस्तुति
संघरत्ना बनकर, भोपाल द्वारा बुद्ध नाटिका।
द साया बैण्ड द्वारा बौद्ध/भक्ति संगीत
दूसरा दिवस – 30 नवम्बर:
श्रीलंका के पारंपरिक लोकनृत्य और गीत
इसके उपरांत अखिल भारतीय कवि सम्मेलन, जिसमें प्रसिद्ध कवि—
सूर्यकुमार पाण्डेय (लखनऊ), स्वयं श्रीवास्तव (उन्नाव), सुमित मिश्रा (ओरछा), हिमांशी बाबरा, मनु वैशाली (रायबरेली), दीपक शुक्ला (भोपाल), अभिसार शुक्ला (दिल्ली) एवं चेतन चर्चित (इंदौर)—अपनी प्रस्तुति देंगे।
सांची में आयोजित यह महोत्सव न केवल पर्यटन को नई ऊर्जा देगा बल्कि बौद्ध संस्कृति, कला और साहित्य के प्रति जनसामान्य में नई रुचि भी जागृत करेगा।

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