नसीमखान सांची
सांची,,,
ऐतिहासिक पर्यटन नगरी सांची में विकास के बड़े-बड़े दावे तो खूब सुनाई देते हैं, लेकिन हकीकत यह है कि नगर परिषद क्षेत्र के वार्ड 10 और 11 के लोगों को आज भी दलदल में बदल चुके रास्तों से होकर गुजरना पड़ रहा है। ग्रामीणों की बार-बार शिकायतों के बाद भी न तो शासन और न ही प्रशासन इस गंभीर समस्या की ओर ध्यान दे पा रहा है।
जानकारी के अनुसार सांची नगर परिषद शहर के विकास पर करोड़ों रुपये खर्च करने का दावा करती रहती है। इसके बावजूद वार्ड 10 और 11 की सड़कें विकास की पोल खोल रही हैं। ग्रामीण बताते हैं कि आजादी के बाद पहली बार करीब पांच वर्ष पहले इन वार्डों को सांची–से–कुआगांव और मांची–गांव मार्ग से जोड़ने का कार्य शुरू हुआ था। सड़क निर्माण शुरू होने पर ग्रामीणों में खुशी की लहर दौड़ पड़ी थी और उम्मीद जगी थी कि अब धूल व कीचड़ की समस्या से छुटकारा मिलेगा।
लेकिन निर्माण एजेंसी के काम बीच में ही छोड़कर चले जाने से स्थिति और बदतर हो गई। अधूरे मार्ग से उड़ती धूल के गुब्बारे और जगह-जगह गड्ढे ग्रामीणों के लिए बीमारी और परेशानी का कारण बन गए। कई बार मुख्य नगरपालिका अधिकारी को अवगत कराने के बाद भी केवल आश्वासन ही मिलता रहा।
बताया जाता है कि पूर्व एजेंसी का कार्य निरस्त कर नगर परिषद ने नई एजेंसी को जिम्मा सौंपा, परंतु महीनों बीत जाने के बाद भी न तो एजेंसी का कोई अता-पता है और न ही निर्माण गतिविधियों की कोई हलचल। इस बीच पाइपलाइन बिछाने के नाम पर सड़क और अधिक खराब हो गई, जिससे मार्ग दलदल में परिवर्तित हो चुका है।
वर्तमान में मांची, कुआगांव, बिलोरी, पिपरिया और नागौरी के लोगों को कीचड़ भरे रास्तों से होकर गुजरने मजबूर होना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने नप प्रशासन के साथ ही सीएम हेल्पलाइन पर कई बार शिकायतें दर्ज कराई हैं। आज सुबह भी शिकायत दर्ज की गई, परंतु कोई समाधान नहीं मिला। इससे साफ है कि जनसमस्याओं के समाधान में न तो प्रशासन और न ही सीएम हेल्पलाइन प्रभावी सिद्ध हो पा रही है।
रामलाल कुशवाहा, सीएमओ, नगर परिषद सांची ने बताया—
“यह मार्ग लोक निर्माण विभाग (लोनिवि) के अधीन आता है। इसके टेंडर हो चुके हैं और शीघ्र ही भूमिपूजन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। हमारे अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष भी लगातार समस्या के समाधान हेतु प्रयासरत हैं। निर्माण शुरू होते ही समस्या दूर हो जाएगी।”
विकास के दावों के बीच वार्ड 10 और 11 की जमीनी हकीकत यह बता रही है कि जब तक सड़कें नहीं बनतीं, तब तक ग्रामीणों की उम्मीदें भी दलदल में फंसी रहेंगी।






