बौद्ध विचार पर केंद्रित दो दिवसीय महाबोधि महोत्सव का भव्य समापन।अंतिम दिवस अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में हास्य, श्रृंगार और भक्ति के रंग—सुप्रसिद्ध कवियों की प्रभावी प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को किया मंत्रमुग्ध

नसीमखान सांची
सांची,,,
संस्कृति विभाग, म.प्र. शासन द्वारा ‘बौद्ध विचार’ पर केंद्रित दो दिवसीय महाबोधि महोत्सव का समापन शनिवार रात सांची स्थित बुद्ध जम्बूद्वीप पार्क परिसर में हुआ। जिला प्रशासन रायसेन एवं महाबोधि सोसायटी ऑफ श्रीलंका के सहयोग से आयोजित इस समारोह के अंतिम दिवस श्रीलंका की ललिता गोमरा एवं दल ने पारंपरिक लोकनृत्य, लोकगायन और मंगलम पूजा जैसी आध्यात्मिक प्रस्तुतियों से दर्शकों को बौद्ध संस्कृति के भावलोक में पहुँचाया।
इसके पश्चात आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में देशभर से आए सुप्रसिद्ध कवियों—सूर्यकुमार पाण्डेय, स्वयं श्रीवास्तव, सुमित मिश्रा, अभिसार शुक्ला, हिमांशी बाबरा, मनु वैशाली, दीपक शुक्ला एवं चेतन चर्तित—ने अपनी-अपनी प्रभावशाली रचनाएँ सुनाईं।
सूर्यकुमार पाण्डेय की व्यंग्य रचनाओं ने सभागार में ठहाकों की गूंज भर दी, वहीं स्वयं श्रीवास्तव और सुमित मिश्रा की भावपूर्ण कविताओं ने श्रोताओं का दिल छू लिया। अभिसार शुक्ला और मनु वैशाली ने भक्ति एवं संवेदना से भरी कविताओं से वातावरण को गरिमामय किया। इंदौर के चेतन चर्तित की प्रेरक पंक्तियों और भोपाल के दीपक शुक्ला की हास्य रचना “पापा सुनो मम्मी मुझे रोज-रोज मारती है…” ने महोत्सव के समापन क्षणों को यादगार बना दिया।
सांस्कृतिक वैविध्य, बौद्ध लोक परंपराओं और काव्य रसधारा से सजे इस दो दिवसीय महोत्सव का समापन देर रात ऊर्जस्वित वातावरण में हुआ।
शब्द, स्वर और संस्कृति से सजा महाबोधि महोत्सव शांति और सौहार्द का संदेश देकर संपन्न हुआ।
इस अवसर पर शांतिपूर्ण ढंग से दोदिवसीय कार्यक्रम के समापन होने पर स्थानीय प्रशासन पुलिस प्रशासन महाबोधि सोसायटी श्री लंका ने सभी अधिकारी कर्मचारियों समाज सेवी नगर वासियों का सफल कार्यक्रम आयोजन के लिए आभार प्रकट किया है।

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