नसीमखान सांची
सांची,,ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों की खेल प्रतिभा निखारने की मंशा से सरकार ने विकासखंड मुख्यालय से करीब तीन किलोमीटर दूर ग्राम आमखेड़ा में लाखों–करोड़ों रुपये की लागत से ब्लॉक स्तरीय खेल मैदान का निर्माण कराया था। लेकिन जिम्मेदारों की लापरवाही के चलते यह मैदान आज मात्र नाम भर रह गया है और पूरी तरह पशुचारागाह में तब्दील हो गया है। हालत यह है कि खेल मैदान उजड़ने की कगार पर पहुंच चुका है।
जानकारी के अनुसार ग्रामीण बच्चों को राज्य और राष्ट्रीय स्तर तक अवसर उपलब्ध कराने की योजना के तहत बड़े बजट में इस मैदान का निर्माण कराया गया था। उम्मीद की गई थी कि गांवों से नई खेल प्रतिभाएं निखरकर सामने आएंगी। लेकिन आमखेड़ा का यह मैदान सरकारी उपेक्षा का शिकार हो चुका है और खिलाड़ियों के सपनों पर पानी फेरता दिख रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार मैदान में बनी सीढ़ियां टूटकर जर्जर हो चुकी हैं, वहीं दरवाजे-खिड़कियां भी गायब हैं। मैदान अब अनैतिक गतिविधियों का अड्डा बनता जा रहा है। सबसे बड़ी बात यह है कि यह मैदान तहसील कार्यालय से कुछ ही कदमों की दूरी पर स्थित है, जहां नायब तहसीलदार रोजाना आते-जाते हैं, लेकिन इसके बावजूद किसी की नजर इस पर नहीं पड़ रही है। यह स्थिति जिला प्रशासन की गंभीर लापरवाही को उजागर करती है।
सरकारी राशि से बनाए गए इस खेल मैदान का अस्तित्व खतरे में है। समय रहते ध्यान न दिया गया तो यह पूरी तरह उजड़ जाएगा और अतिक्रमणकारियों के कब्जे में जाने की आशंका भी बन रही है।
इस मामले में सीईओ जनपद सांची शंकर पांसे ने कहा कि—
“मामला संज्ञान में है, आवश्यकतानुसार जल्द ही मरम्मत कराकर मैदान को ठीक कराया जाएगा।”
अगर जिम्मेदार समय पर नहीं जागे, तो यह खेल मैदान विकास की नहीं, उपेक्षा की मिसाल बनकर रह जाएगा।






