नसीमखान सांची
सांची,,,,विश्व धरोहर स्थल सांची स्तूप की पहचान रखने वाली नगरी में निर्मित सिविल अस्पताल आज व्यवस्थागत कमियों के कारण अपेक्षित स्वास्थ्य सेवाएं देने में असमर्थ नजर आ रहा है। करोड़ों रुपये की लागत से निर्मित भव्य भवन और उपलब्ध कराई गई मशीनों के बावजूद अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों और तकनीकी स्टाफ की कमी साफ दिखाई दे रही है।
पूर्व में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र रहे इस अस्पताल को क्षेत्र की महत्ता को देखते हुए सिविल अस्पताल का दर्जा प्रदान किया गया था। उद्घाटन के समय आधुनिक सुविधाओं और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का भरोसा दिलाया गया था। प्रारंभिक दौर में आवश्यक उपकरण भी उपलब्ध कराए गए, ताकि स्थानीय स्तर पर ही जांच और उपचार संभव हो सके।
हालांकि समय के साथ कई व्यवस्थाएं प्रभावित होती गईं। एक्स-रे मशीन लंबे समय तक बंद रहने के बाद हाल ही में पुनः संचालित हुई, जबकि अन्य उपकरण तकनीकी स्टाफ के अभाव में उपयोग में नहीं आ पा रहे हैं।
वर्तमान में अस्पताल में सीमित स्थायी चिकित्सकों के सहारे 24 घंटे सेवाएं संचालित की जा रही हैं। विशेषज्ञ चिकित्सकों की अनुपस्थिति के कारण गंभीर रोगियों को अन्य शहरों के अस्पतालों का रुख करना पड़ता है।
अस्पताल स्टाफ के लिए आवासीय सुविधा का अभाव भी बड़ी समस्या बना हुआ है। डॉक्टरों एवं कर्मचारियों को निजी व्यवस्था या अपडाउन के सहारे सेवा देनी पड़ रही है। क्षेत्र में उपलब्ध शासकीय भूमि एवं जर्जर भवनों का समुचित उपयोग कर इस समस्या का समाधान निकाला जा सकता है, यदि इस दिशा में ठोस पहल की जाए।
नगरवासियों का मानना है कि ऐतिहासिक पहचान वाली नगरी में स्वास्थ्य सेवाएं भी उसी स्तर की होनी चाहिए, जिसकी अपेक्षा क्षेत्रवासी लंबे समय से कर रहे हैं।





