नसीमखान सांची
सांची,,,
सांची और विदिशा के बीच लगभग आठ किलोमीटर का फासला अब कागज़ों तक सीमित रह गया है। इस मार्ग पर तेजी से विकसित हो रही बड़ी-बड़ी होटलों और गार्डनों ने दोनों क्षेत्रों को लगभग जोड़ दिया है। कृषि भूमि पर बने इन विवाह स्थलों में इन दिनों शादी-विवाह कार्यक्रमों की भरमार है, लेकिन इन आयोजनों में बजने वाले तेज डीजे और ध्वनि यंत्र आसपास के गांवों के छात्रों के भविष्य पर सवाल खड़े कर रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, सांची–विदिशा मार्ग पर बीते कुछ वर्षों में कृषि भूमि खरीदकर आलीशान होटल और शादी गार्डन तैयार किए गए। यहां स्थानीय ही नहीं, बाहरी क्षेत्रों से भी लोग अपने पारिवारिक समारोह आयोजित करने पहुंच रहे हैं। इन आयोजनों में देर रात तक तेज आवाज में डीजे और बैंड-बाजों का शोर गूंजता रहता है।
इसका सबसे अधिक असर नोनाखेड़ी, कमापार और सांची से सटे अन्य गांवों में देखा जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि रातभर गूंजती तेज ध्वनि से जहां लोगों की नींद प्रभावित हो रही है, वहीं वार्षिक परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्र-छात्राओं की पढ़ाई में भी गंभीर बाधा उत्पन्न हो रही है।
उल्लेखनीय है कि इन दिनों विद्यालयों की वार्षिक परीक्षाएं चल रही हैं। ऐसे समय में तेज ध्वनि प्रदूषण छात्रों की सालभर की मेहनत पर विपरीत प्रभाव डाल सकता है। ग्रामीणों और अभिभावकों ने चिंता जताते हुए बताया कि लगातार हो रहे आयोजनों से बच्चों की एकाग्रता भंग हो रही है।
हालांकि उच्च न्यायालय द्वारा डीजे एवं तेज ध्वनि यंत्रों के संचालन को लेकर स्पष्ट गाइडलाइन तय की जा चुकी है। जिला प्रशासन और पुलिस द्वारा भी होटल एवं गार्डन संचालकों को नियमों से अवगत कराते हुए चेतावनी दी गई है। यहां तक कि जिला कलेक्टर द्वारा वार्षिक परीक्षाओं के दौरान ध्वनि नियंत्रण को लेकर निर्देश भी जारी किए गए हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर इनका प्रभाव नजर नहीं आ रहा।
ग्रामीणों का आरोप है कि नियमों और आदेशों के बावजूद कुछ संचालक बेखौफ होकर तेज ध्वनि में कार्यक्रम आयोजित कर रहे हैं। यदि समय रहते इस पर सख्ती नहीं बरती गई तो इसका सीधा असर छात्रों के परीक्षा परिणामों पर पड़ सकता है।
यदि प्रशासन ने समय रहते ध्वनि प्रदूषण पर लगाम नहीं कसी, तो उत्सव की यह गूंज कई छात्रों के सपनों को दबा सकती है।





