नसीमखान सांची
उन्नयन के बाद भी स्वास्थ्य सेवाएं अधूरी, निरीक्षण में डॉक्टर-कर्मचारी अनुपस्थित मिले।
सांची — सरकार द्वारा आमजन को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन सांची के सिविल अस्पताल में व्यवस्थाएं अपेक्षा के अनुरूप दिखाई नहीं दे रही हैं। ऐतिहासिक और विश्व प्रसिद्ध स्थल होने के कारण इस अस्पताल का उन्नयन कर इसे सिविल अस्पताल का दर्जा तो दे दिया गया, लेकिन सुविधाओं की कमी के कारण मरीजों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है।
बताया जाता है कि सिविल अस्पताल के स्तर के अनुरूप यहां डॉक्टरों की कमी बनी हुई है। वहीं लाखों रुपये की लागत से उपलब्ध कराई गई कई स्वास्थ्य मशीनें ऑपरेटरों के अभाव में बंद पड़ी हैं और ताले में जकड़ी बताई जाती हैं। दैनिक उपयोग में आने वाली एक्स-रे मशीन की स्थिति भी खराब बताई जा रही है, जो कभी भी बंद हो सकती है। इससे मरीजों को जांच के लिए काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
इस क्षेत्र सहित आसपास के इलाकों से दुर्घटना में घायल लोग भी इलाज के लिए इसी अस्पताल में पहुंचते हैं, लेकिन पर्याप्त सुविधाएं न मिलने से उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। विभिन्न बीमारियों से ग्रसित मरीजों को भी उपचार के लिए इधर-उधर भटकना पड़ता है।
बताया जाता है कि अस्पताल में कुल 59 स्वास्थ्य कर्मी तैनात हैं, लेकिन उनकी नियमित उपस्थिति पर सवाल उठते रहते हैं। इसका खुलासा तब हुआ जब कलेक्टर के निर्देश पर हाल ही में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एन.एच. मांडरे ने अस्पताल का आकस्मिक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने व्यवस्थाओं का जायजा लिया और कई डॉक्टर व कर्मचारी ड्यूटी से अनुपस्थित पाए गए। इस पर नाराजगी जताते हुए सीएमएचओ ने उनकी अनुपस्थिति दर्ज कर एक दिन का वेतन काटने के निर्देश दिए।
वहीं अस्पताल में कार्यरत डॉक्टरों और कर्मचारियों के लिए आवास की कोई व्यवस्था नहीं है, जिसके कारण उन्हें दूर-दराज से अपडाउन करना पड़ता है। ऐसे में विभाग को कर्मचारियों की आवास व्यवस्था पर भी ध्यान देने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
सिविल अस्पताल का दर्जा मिलने के बाद भी यदि मूलभूत स्वास्थ्य सुविधाएं अधूरी रहें, तो इसका खामियाजा आखिरकार आम मरीजों को ही भुगतना पड़ता है।





