तहसील कार्यालय तीन किमी दूर होने से बढ़ी किसानों की परेशानी, समय और खर्च की दोहरी मार।सांची से आमखेड़ा शिफ्ट होने के बाद भटक रहे ग्रामीण, एक ही काम के लिए लगाने पड़ रहे कई चक्कर

नसीमखान सांची
सांची,,,
विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी सांची, जो विकासखंड का प्रमुख केंद्र मानी जाती है और जहां अधिकांश शासकीय कार्यालय संचालित हैं, वहीं तहसील कार्यालय को नगर से लगभग तीन किलोमीटर दूर ढकना-चपना ग्राम पंचायत के ग्राम आमखेड़ा में स्थानांतरित किए जाने से किसानों और गरीब तबके के लोगों की परेशानियां लगातार बढ़ती जा रही हैं।
जानकारी के अनुसार, पूर्व में सांची में ही उपतहसील (टप्पा) कार्यालय संचालित होता था, जिससे आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले लोग अपने शासकीय एवं राजस्व संबंधी कार्य एक ही स्थान पर आसानी से निपटा लेते थे। लेकिन कुछ वर्ष पूर्व नवीन भवन निर्माण के बाद इस कार्यालय को आमखेड़ा स्थानांतरित कर दिया गया। उस समय भी स्थानीय लोगों ने इसका विरोध किया था, लेकिन उनकी आवाज को गंभीरता से नहीं लिया गया।
अब हालात यह हैं कि दूरदराज से आने वाले ग्रामीणों को पहले आमखेड़ा स्थित तहसील कार्यालय पहुंचना पड़ता है, और यदि वहां कार्य पूर्ण नहीं हो पाता तो उन्हें पुनः सांची आना पड़ता है। इस प्रक्रिया में उनका समय और पैसा दोनों बर्बाद हो रहा है। खासतौर पर किसान, मजदूर, हरिजन और आदिवासी वर्ग के लोगों को अतिरिक्त आर्थिक बोझ और परेशानी झेलनी पड़ रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि “पहले सांची में ही सभी काम एक ही स्थान पर आसानी से हो जाते थे, लेकिन अब आमखेड़ा जाने के बाद भी कई बार काम अधूरा रह जाता है और फिर सांची के चक्कर लगाने पड़ते हैं। इससे दिनभर की मजदूरी भी छूट जाती है और जेब पर भी अतिरिक्त बोझ पड़ता है।”
किसानों ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए बताया कि “हम लोग दूर-दराज गांवों से किराया खर्च कर तहसील कार्यालय पहुंचते हैं, लेकिन वहां संबंधित कर्मचारी या पटवारी नहीं मिलने पर हमें वापस सांची आना पड़ता है। गरीब आदमी के लिए यह व्यवस्था किसी सजा से कम नहीं है।”
स्थिति की विडंबना यह भी है कि तहसील कार्यालय आमखेड़ा में होने के बावजूद कई पटवारी अपना कार्य सांची में ही करते नजर आते हैं। ऐसे में जब लोगों को पटवारियों की आवश्यकता पड़ती है, तो उन्हें फिर सांची के चक्कर लगाने पड़ते हैं, जिससे परेशानी और बढ़ जाती है।
सांची एक अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त ऐतिहासिक स्थल होने के कारण यहां प्रशासनिक गतिविधियां और वीआईपी आवागमन भी बना रहता है। ऐसे में नायब तहसीलदार सहित अन्य अधिकारियों को भी बार-बार सांची आना पड़ता है, जिससे प्रशासनिक व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है और तहसील में आने वाले लोगों को लंबे इंतजार का सामना करना पड़ता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सांची में पर्याप्त शासकीय भूमि उपलब्ध होने के बावजूद तहसील कार्यालय को दूर स्थानांतरित किया जाना समझ से परे है। यदि प्रशासन चाहे तो पुनः सांची में तहसील कार्यालय स्थापित कर आमजन को राहत दी जा सकती है।
ग्रामीणों और किसानों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि या तो तहसील कार्यालय को पुनः सांची में स्थापित किया जाए अथवा सांची में ही स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि लोगों को अनावश्यक भागदौड़, समय की बर्बादी और आर्थिक बोझ से राहत मिल सके।
“जब सरकारी व्यवस्था आमजन की सुविधा के बजाय परेशानी का कारण बनने लगे, तो बदलाव की मांग खुद जनता की आवाज बन जाती है।”

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