नसीमखान सांची
सांची,,, विश्व प्रसिद्ध पर्यटन एवं विकासखंड मुख्यालय के रूप में पहचान रखने वाले सांची में शासन की विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन में जुटे सरकारी अधिकारी एवं कर्मचारियों के सामने आज सबसे बड़ी समस्या अपने सरकारी आशियाने की बनी हुई है। नगर में अनेक विभागीय कार्यालय संचालित होने के बावजूद अधिकांश कर्मचारियों को सरकारी आवास उपलब्ध नहीं हो सके हैं, जिसके चलते उन्हें महंगे किराए के मकानों में रहना पड़ रहा है या फिर प्रतिदिन अपडाउन कर सेवाएं देना मजबूरी बन चुका है।
जानकारी के अनुसार सांची को विकासखंड का दर्जा मिलने के बाद यहां जनपद पंचायत, नगर परिषद, विद्युत वितरण कंपनी, स्वास्थ्य विभाग, पुलिस विभाग, महिला एवं बाल विकास, शिक्षा विभाग सहित अनेक शासकीय कार्यालय संचालित किए जा रहे हैं। इन कार्यालयों में सैकड़ों अधिकारी-कर्मचारी दिन-रात शासन की योजनाओं को आमजन तक पहुंचाने में जुटे हैं, लेकिन इनके लिए पर्याप्त सरकारी आवासों की व्यवस्था आज तक नहीं हो सकी है।
बताया जाता है कि 83 पंचायतों में योजनाओं का संचालन करने वाली जनपद पंचायत में लगभग दस अधिकारी-कर्मचारी कार्यरत हैं, लेकिन यहां केवल अधिकारी के लिए ही आवास उपलब्ध है। शेष कर्मचारी निजी मकानों, किराए के भवनों अथवा अपडाउन के सहारे सेवाएं देने को विवश हैं। वहीं जनपद पंचायत की शासकीय भूमि पर भी कब्जों की बात सामने आती रही है।
नगर परिषद की स्थिति भी इससे अलग नहीं है। परिषद के पास कभी सीएमओ आवास एवं विश्राम गृह हुआ करता था, लेकिन अब अधिकारी स्वयं किराए के मकान में रहने को मजबूर बताए जाते हैं। परिषद में लगभग 23 स्थायी अधिकारी-कर्मचारी कार्यरत हैं, जबकि संविदा एवं दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों की संख्या भी कम नहीं है। इसके बावजूद कर्मचारियों के लिए आवासीय सुविधा नहीं बन पाई है।
इसी प्रकार विद्युत वितरण कंपनी के अधिकारी एवं कर्मचारी चौबीसों घंटे नगर की विद्युत व्यवस्था बनाए रखने में जुटे रहते हैं, लेकिन इनके पास भी रहने के लिए पर्याप्त सरकारी भवन नहीं हैं। कई कर्मचारी जोखिमपूर्ण परिस्थितियों में ड्यूटी करने के बाद भी किराए अथवा दूरस्थ आवागमन की समस्या झेल रहे हैं।
नगर की कानून व्यवस्था संभालने वाले पुलिस विभाग के लगभग 25 अधिकारी एवं कर्मचारी भी वर्षों पुराने जर्जर भवनों अथवा किराए के मकानों में रहकर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। महिला एवं बाल विकास विभाग का कार्यालय तक किराए के भवन में संचालित हो रहा है। यहां पद रिक्त होने के कारण कर्मचारियों पर अतिरिक्त कार्यभार भी बढ़ा हुआ है।
स्वास्थ्य विभाग में लगभग 59 अधिकारी एवं कर्मचारी तैनात होकर लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करा रहे हैं। सरकार द्वारा सिविल अस्पताल की सौगात तो दी गई, लेकिन चिकित्सकों एवं कर्मचारियों के लिए पर्याप्त आवासीय व्यवस्था अब तक नहीं हो सकी। परिणामस्वरूप कई कर्मचारी अपडाउन कर सेवाएं देने को विवश हैं।
शिक्षा विभाग की स्थिति भी चिंताजनक बनी हुई है। करोड़ों रुपये की लागत से विद्यालय भवन तैयार किए गए, लेकिन शिक्षकों के लिए आवास निर्माण की ओर ध्यान नहीं दिया गया। सांदीपनि विद्यालय सहित कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में पदस्थ शिक्षक प्रतिदिन अपडाउन कर विद्यार्थियों को शिक्षा देने पहुंच रहे हैं।
नगर में लगातार बढ़ती सरकारी गतिविधियों एवं कर्मचारियों की संख्या के अनुपात में आवासीय सुविधाओं का अभाव अब गंभीर समस्या का रूप लेता जा रहा है। सवाल यह उठ रहा है कि जब सरकार आमजन के लिए पीएम एवं सीएम आवास योजनाएं संचालित कर रही है, तब शासन की योजनाओं को धरातल तक पहुंचाने वाले अधिकारी-कर्मचारियों के लिए स्थायी आवास व्यवस्था क्यों नहीं की जा रही।
स्थानीय लोगों एवं कर्मचारियों का मानना है कि यदि शासन स्तर पर विभागीय आवासों के निर्माण की दिशा में पहल की जाए तो कर्मचारियों को राहत मिल सकती है तथा प्रशासनिक कार्यों की गुणवत्ता और उपलब्धता में भी सुधार संभव है।
सांची में योजनाओं को अमलीजामा पहनाने वाले अधिकारी-कर्मचारी आज स्वयं “आशियाने” की प्रतीक्षा में हैं।





