नसीम खान संपादक
सांची,,, कहने को तो सरकार जनता से अच्छा सुलूक अच्छी कार्यप्रणाली बनाने की पुलिस से उम्मीद लगाती है तथा चौबीस घंटे जनता को बेहतर सुरक्षा देने की कवायद करती है परन्तु इन्हीं पुलिस कर्मियों को अपने ही सर छुपाने को आवास उपलब्ध नहीं हो पाते जिससे पुलिस कर्मियों को किराये के मकानों में अपनी गुजर-बसर करने पर मजबूर होना पड़ता है । पुलिस विभाग अपने ही कर्मचारियों को आवास विहीन अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने पर मजबूर होना पड़ता है।
जानकारी के अनुसार यह स्थल विश्व विख्यात पर्यटक स्थल होने से यहां तैनात पुलिस कर्मियों की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है जब इस पर्यटक स्थल की जनता को पुलिस रात-दिन चौकस रहकर सुरक्षा प्रदान करने में जुटी दिखाई देती है तथा इस स्थल पर होने वाले अपराधों पर अंकुश लगाने की जद्दोजहद करती देखी जाती है इतना ही नहीं इस विश्व विख्यात पर्यटक स्थल पर जब जब विशिष्ट अतिविशिष्ट व्यक्तियों का आना जाना होता है तब भी इस स्थल की पुलिस उनकी सुरक्षा में तथा उनकी सुविधा में आगे पीछे होती दिखाई दे जाती है बावजूद इसके पुलिस विभाग इन पुलिस कर्मियों को ही सुविधा देने तथा उन्हें आवास तक उपलब्ध कराने में पीछे दिखाई देता है वैसे तो इस स्थल पर स्थापित पुलिस थाने में एक नगर निरीक्षक एक उप नगर निरीक्षक तथा 6 सहायक उपनिरीक्षक 4 प्रधान आरक्षक 11 आरक्षक 3 महिला आरक्षक सहित 6 नगर सैनिक पदस्थ किये गये है कुल मिलाकर 32 पुलिस अधिकारी कर्मचारी तैनात रहते हैं परन्तु इन पुलिस कर्मियों को अपने ही विभाग द्वारा आवास उपलब्ध नहीं कराया जा सका जबकि वर्षों पूर्व पुलिस विभाग द्वारा पुलिस कर्मियों के लिए 12 आवास निर्मित किये गये थे वह भी जर्जर अनुपयोगी अवस्था में पहुंच चुके है इन भवनों में केवल चार भवन या तो पुलिस विभाग द्वारा मरम्मत कराकर अथवा इनमें रहने वाले पुलिस कर्मियों ने अपने स्तर पर मरम्मती करण कर अपने आवास बना लिये है जबकि शेष 28 पुलिस कर्मियों को मंहगे मिलने वाले किराये के भवनों से तैर करना पड़ रहा है बताया जाता है कि इन पुलिस कर्मियों को विभाग की ओर से मात्र ढाई सौ रुपए माह ही किराए के रूप में मिल पाते हैं जबकि किराये से मिलने वाले भवन हजारों रुपए माह पर मिलते हे यही हाल पुराने थाना भवन जो रेलवे स्टेशन मार्ग पर स्थित है इस परिसर में छायेदार पेड़ लगे होने से लोगों सहित यहां आने वाले पर्यटकों को छांव का सहारा मिलता देख लोग ठहर जाते हैं इस भवन की खस्ता हालत का इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि थाना भवन के पोर्च को गिरने के डर से पुलिस कर्मियों द्वारा लोहे के प्लर का सहारा देना पड़ा । जिससे कभी भी इस भवन के ढहने से इंकार नहीं किया जा सकता है इस भवन के अंदरूनी हिस्से की छत से प्लास्तर भी झड़ कर गिरने लगा है । बावजूद इसके पुलिस विभाग अपने ही पुलिस कर्मियों को भवन निर्माण नहीं करा सका हालांकि लगभग तीन साल पहले पुलिस कर्मियों को भवन निर्माण की खबर अखबार की सुर्खियां बनी थी तब यहां तैनात पुलिस अधिकारी यह कहते देखे गए थे कि नवीन पुलिस आवास भवनों का प्रस्ताव पारित किया जा चुका है तथा शीघ्र ही पुलिस कर्मियों के लिए नवीन भवन उपलब्ध हो जायेगे तथा पुलिस कर्मियों की आवास की समस्या हल हो जाएगी इतना लंबा अंतराल गुजरने के बावजूद पुलिस कर्मियों के लिए आवास की समस्या बनी हुई है जबकि इस विश्व विख्यात पर्यटक स्थल पर पुलिस को स्वयं के सर छुपाने आवास न होने से किराये के आवास का सहारा लेना पड़ रहा है इस मामले में पुलिस अधिकारी कर्मचारी कुछ भी कहने से बचते दिखाई दे रहे हैं हालांकि इतना जरूर कहा जा रहा है कि पुलिस आवास शीघ्र ही निर्मित होंगे । ऐसे में आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि पुलिस विभाग ने अपने ही भवनों को निर्मित करने पुलिस हाउसिंग बोर्ड को अस्तित्व में ला खड़ा किया इसके बाद भी पुलिस को अपने ही भवन नसीब नहीं हो पा रहे हैं जिससे पुलिस कर्मियों को आपात स्थिति में अपने किराये के भवनों से समय लग जाता है जबकि नगर की सुरक्षा के साथ ही थाना क्षेत्रांतर्गत आने वाले क्षेत्रों में पुलिस रात-दिन जुटी दिखाई देती है तथा शांति सौहार्द बनाए रखने की कवायद में लगी रहती है परन्तु इनमें रात-दिन एक करने वाले पुलिस कर्मियों को अपनी ही कालोनी अथवा आवास की दरकार बनी हुई है ।






