वसीम कुरैशी की रिपोर्ट गढ़ी रायसेन
रायसेन गढ़ी,,, वैसे तो डाक्टर को भगवान का रूप कहा जाता है जब मरीज जीवन और मौत के बीच जंग लड़ता है तब वह जीवन जीतने के लिए डाक्टर के पास पहुंच जाता है परन्तु जब डॉक्टर ही बिना जांचे परखे दवा दे तो उसे क्या कहा जाए ऐसा ही मामला कस्बा गढ़ी का प्रकाश में आया है।
जानकारी के अनुसार गढ़ी कस्बे में आनंद विश्वास बंगाली डाक्टर के रूप में अपनी क्लीनिक चला रहे हैं कि एक मरीज कल्लू पिता इस्माइल जो गढ़ी के ही रहने वाले हैं अपनी बीमारी के चलते उक्त डाक्टर की क्लीनिक पर पहुंच गए तथा डाक्टर को अपनी बीमारी बताकर इलाज करवाना चाहा परन्तु डाक्टर विश्वास ने आनन-फानन में बिना जांचे इंजेक्शन दे दिया जिससे मरीज की हालत और बिगड गई जिससे युवक की सांसें थमने लगी जब लोगों को पता चला तो कल्लू को आनन-फानन में रायसेन जिला अस्पताल पहुंचाया। इस मामले को लेकर मरीज़ के परिजनों ने कलेक्टर एवं एसपी को शिकायत की साथ ही जिला चिकित्सा अधिकारी को भी आवेदन देकर उक्त नीम हकीम के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की साथ ही गढ़ी पुलिस चौकी पर भी शिकायत की गई तब गढ़ी पुलिस चौकी पर भी डाक्टर व पीड़ित के परिजनों का काफी विवाद हुआ। इसके पूर्व भी ऐसे अनेक मामले सामने आ चुके हैं साथ ही जहां गर्भपात पर सरकार ने प्रतिबंध लगा दिया है तब सरकार एवं कानून को ठेंगा दिखाकर गर्भपात कराने के मामले भी चर्चित हो रहे हैं जो भ्रूण हत्या की श्रेणी में आते हैं ऐसा नहीं है कि बंगाली डाक्टर गढ़ी में ही अपने कारनामों को अंजाम दे रहे हैं बल्कि पूरे जिले में ऐसे डाक्टरोका जाल बिछा हुआ है तथा ऐसे जिले भर में निजी डॉक्टर के रूप में हजारों की संख्या में नीम-हकीम अपने काम को धड़ल्ले से अंजाम दे रहे हैं ऐसा भी नहीं है कि इस सारे गोरखधंधे पर शासन प्रशासन की नजर न पहुंच पा रही है तब जिला स्वास्थ्य विभाग में बैठे जिम्मेदारों की मिली भगत से इंकार नहीं किया जा सकता जब सरकार लोगों को स्वास्थ्य विभाग के माध्यम से सैकड़ों रोज़ नित नई योजनाएं क्रियान्वित कर रहे हैं तब यह योजना धरातल पर कैसे पहुंच पा रही होगी जिसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पीड़ित सरकार की योजनाओं को अनदेखी कर निजी नीम-हकीम से अपनी जान बचाने पहुंच जाते हैं जिससे ऐसी घटनाएं देखने सुनने को मिल जाती है समय रहते इन निजी डॉक्टरो पर रोक लगाई जानी चाहिए जिससे बीमारी का उपचार कराने लोग सरकारी अस्पतालों तक पहुंच सके
नसीम खान संपादक






