स्कूली बच्चों पर मंहगी किताबों का पड़ रहा भार

वसीम कुरैशी रिपोर्टर

एनएचएम ,संविदा स्वास्थ्य कर्मियों की मांगें हुईं पूरी, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह स्वास्थ्य मंत्री डॉ प्रभुराम चौधरी का फूलमालाओं से स्वागत किया।वहीं मिठाई खिलाकर आभार माना गया।
एनएचएम संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी संघ द्वारा मांगे पूरी किए जाने पर आभार प्रकट करनेके लिए सीएम हाउस, स्वास्थ्य मंत्री के भोपाल स्थित बंगलों पर पहुंचे स्वास्थ्य कर्मचारी । कार्यक्रम में मुख्य रुप से डॉ आरती गंगवार सदस्य राज्य कार्यकारिणी , डॉ दिलीप माहेश्वरी , संजीव तिग्गा, पंकज शर्मा, पंकज लोधी, संतोष जाटव, इमरत , बृजमोहन गुर्जर संतोष जाटव विकासखंड आदि अधिकारी कर्मचारी उपस्थित रहे।
[9/7, 3:51 pm] Vasim Qureshi: ‘3 बच्चों की कोर्स की किताबें 11 हजार में आई’:अभिभावक ने कहा- मनमानी दरों पर बिक रही किताबें, DPC बोले- शिकायत मिलेगी तो जांच करेंगे
रायसेन।जिले में नवीन शिक्षा सत्र शुरू होने के बाद शिक्षण संस्थानों की मनमानी के कारण अब अभिभावकों पर अतिरिक्त खर्चों का बोझ पढ़ना शुरू हो गया। मनमाने तरीके से कोर्स और निश्चित दुकानों पर उसकी बिक्री अभिभावकों की परेशानी का कारण बनी हुई है।
दरअसल नवीन शिक्षण सत्र को लेकर कलेक्टर अरविंद दुबे ने स्पष्ट आदेश जारी किए थे कि निजी शिक्षण संस्थानों के कोर्स खरीदने के लिए प्राइवेट स्कूल अभिभावकों को एक दुकान से ही लेने को बाध्य नहीं करेंगे। लेकिन अब जब शिक्षा सत्र शुरू हो गया है तो हर निजी शिक्षण संस्थान का कोई सिर्फ एक ही दुकान पर महंगे दामों पर मिल रहा है। लेकिन कलेक्टर के आदेश को अमल कराने की जिम्मेदारी डीईओ एमएल राठौरिया और डीपीसी एसके उपाध्याय की थी। वह किसी भी शिक्षण संस्थान और निश्चित स्टेशनरी दुकान पर जांच करने नहीं पहुंचे। जिसका दुष्परिणाम यह हो रहा है कि अभिभावक चार से पांच हजार रुपए प्रति कक्षा की किताबें और हजार से तीन हजार रुपए तक की यूनिफार्म एक ही दुकान से खरीदने को मजबूर हैं।इस तरहप्रशासनिक उदासीनता के कारण निजी शिक्षण संस्थान व्यवसायिक केंद्र में तब्दील हो गए हैं। हर कक्षा के कोर्स और प्रत्येक विद्यार्थी की यूनिफार्म के लिए अभिभावकों को एक निश्चित दुकान बताई जा रही है।अनेक शिक्षक ऐसे हैं जिनका मनपसंद स्थान पर तबादला नहीं हुआ तो जिला शिक्षा अधिकारी और जिला परियोजना अधिकारी शिक्षा विभाग से सांठ-गांठ करके कार्यालय में अटैचमेंट करा लिया और कई शिक्षक ऐसे हैं जो प्रतिनियुक्ति पर तीन साल के लिए कार्यालय में अटैच हुए, लेकिन 10 से अधिक सालों से अभी भी अटैच हैं।

इस संबंध में अभिभावक सुशांत समाधिया,राजीव तिवारी ,मुकेश सेन का कहना है कि कोर्स अत्यधिक महंगी दरों पर मिल रहे हैं ।3 बच्चों का कोर्स लगभग 11,000 में आया है। डीपीसी एसके उपाध्याय का कहना है कि आदेश किए हैं। शिकायत मिलेगी तो जांच करेंगे।

नसीम खान संपादक

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