चुनावी साल में भी कार्यालयों में आडिट कराने पर लगा पलीता।

नसीम खान संपादक
सांची,,, वैसे तो सरकारी कार्यालयों में चलने वाले कार्य का सरकार के नियमानुसार साल में दो बार आडिट कराने का नियम बनाया गया था जिससे सरकारी कामकाज में तथा खर्च होने वाली सरकारी राशि में पारदर्शिता बनी रहे परन्तु इन दिनों इसमें भी पलीता लगा दिखाई देने लगा है।
जानकारी के अनुसार सरकार की खर्च होने वाली विभिन्न विकास कार्य सहित अन्य कार्यों में खर्च की जाने वाली राशि का सही उपयोग हो इसके लिए सरकार ने ही साल में दो बार आडिट कराने का नियम लागू किया गया है जिससे भृष्टाचार पर भी नकेल लग सके तथा सरकार की खर्च होने वाली राशि में भी आडिट के माध्यम से पारदर्शिता बनी सके। परन्तु ऐसा बताया जाता है कि केंद्र सरकार अंतर्गत आने वाले मनरेगा पीएम आवास योजना राष्ट्रीय सामाजिक सहायता ग्रामीण आजीविका मिशन स्वास्थ्य भारत मिशन राशन वितरण नलजल योजना वित्त योजना सहित अनेक जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन होने पर तथा सरकारी राशि वैध रूप से खर्च की गई है अथवा नहीं इसमें पारदर्शिता लाने साल में दो बार आडिट कराने का नियम रखा गया है परन्तु इस आडिटी करण को ताक पर रख दिया गया है तथा सरकारी राशि खर्च तो की जा रही है परन्तु यह नहीं कहा जा सकता कि वह सही ढंग से योजनाओं पर हो रही है अथवा पलीता लग रहा है । तथा सरकारी राशि खर्च करने के बावजूद इसकी पार्दर्शिता को ठेंगा दिखाया जा रहा है जिससे लोगों में सन्देह खड़ा हो रहा है जबकि इन सरकारी खर्च होने पर मप्र स्टेट सामाजिक संपरीक्षा समिति भोपाल अंतर्गत सोशल आडिट का काम प्रशिक्षित संविदा कर्मी डिस्ट्रिक्ट आर्डिनेटर एवं ब्लाक को आर्डिनेटर पदस्थ किये गये है परन्तु इन दिनों यह कार्य थमा हुआ है तब आडिट न होने से सरकारी राशि पर भी संदेह खडा हो रहा है तथा पार्दर्शिता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं दूसरी ओर इस आडिट कार्य में जुटे कर्मचारियों को भी वेतन के लाले पड़े हुए हैं इतना ही नहीं चार चार महीने में भी वेतन न मिलने से इस काम में जुटे लोगों के सामने भरण पोषण की समस्या भी खडी हो गई है जबकि शासन के निर्देशानुसार इन कर्मचारियों का वेतन एक से पांच तारीख के बीच हम माह हो जाना चाहिए इस वेतन की मांग अनेक बार अनुनय-विनय करने के बाद भी नहीं मिल पा रहा है जिससे इन कर्मचारियों को काम नहीं मिल रहा दूसरी तरफ इन कर्मचारियों में असंतोष बढ़ रहा है तथा भविष्य में इन कर्मचारियों के आंदोलन से इंकार भी नहीं किया जा सकता है ।

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