वसीम कुरैशी रिपोर्टर
लेकिन मीडिया को जांच टीम ने नहीं दी जानकारी,फिर भी
कलेक्टर अरविंद दुबे ने दिए उच्च स्तरीय जांच के आदेश
रायसेन।
रायसेन सीएमएचओ कार्यालय में जीपीएफ, डीपीएफ फैमिली पेंशन मृतक कर्मचारियों की राशि पीएफ टीए सहित अन्य मदों की राशि कर्मचारियों ने अपने और अपने रिश्तेदारों के खातों में करोड़ों रुपये डालने का बड़ा घोटाला सामने आने के बाद अब इसकी परतें खुलने लगी हैं।
भोपाल की टीम जांच करने जिला कोषालय रायसेन पहुंची थी यहां दिन भर टीम में शामिल अधिकारियों ने रिकॉर्ड खंगाला। एक और जानकारी सामने आई है की छह नहीं बल्कि विभाग के 13 खातों में घोटाले की राशि डाली गई थी। इनमें से तीन खाते तो एक ही व्यक्ति के हैं।
कलेक्टर अरविंद दुबे ने सीएमएचओ डॉ दिनेश खत्री को दो तीन दिन पहले ही घोटाला करने वाले कर्मचारियों पर एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए थे ।लेकिन उनकी भूमिका भी इस मामले में पूरी तरह से संदिग्ध लग रही है। 13 कर्मचारियों में से सिर्फ तीन को ही निलंबित किया गया है। बाकी पर क्यों मेहरबानी बरती जा रही है।जबकि सूत्रधार और मास्टर माइंड अभी अपने बचाव के तरीके तलाश रहे है। इस घोटाले में कई बड़े नाम भी शामिल होने की संभावना है।
जांच करने जिला कोषालय अधिकारी को दिए आदेश…
राज्य स्तरीय से कोषालय भोपाल की टीम विस्तृत जांच कर रही है। प्रारंभिक जांच में जिन कर्मचारियों को दोषी पाया गया उनके खिलाफ निलंबन की कार्रवाई एवं फिर केस दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। जिला कोषालय अधिकारी को निर्देश दिए हैं, यह जांच पड़ताल बहुत अच्छी तरीके से हो जिससे कि और कहीं यदि इस तरीके की त्रुटियां हुई है। वह सामने आ सके।
फैमिली पेंशन में भी किया है घोटाला….
भरोसेमंद सूत्र बताते हैं कि जीपीएफ, डीपीएफ ही नहीं कर्मचारियों की फेमिली पेंशन भुगतान में भी घोटाला किया गया है। विभाग के मृत कर्मचारियों, इस्तीफा देने वाले कर्मचारियों के भुगतान में भी बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की गई हैं। जांच सही दिशा में और ईमानदारी से जारी रही तो सारी गड़बड़ियां सामने आ जाएंगी।
सीएमएचओ का राइट हैंड बड़े बाबू ने रचा घोटाले का प्लान…..
जिला मलेरिया विभाग से वर्ष2021 में रिटायर्ड बाबू को किसके आदेश पर जिला मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग में नौकरी पर रखा गया था।इस करोड़ों के महाघोटाले में इस सेवानिवृत्त बाबू और सूत्रधार हेड क्लर्क और कम्प्यूटर के मास्टर माइंड हेमंत महोबे और एक महिला क्लर्क की भूमिका सहित विभाग के एक जिम्मेदार अधिकारी संदिग्ध नजर आ रही है।कलेक्टर साहब को जांच इन्हीं घोटालेबाजों से पूछताछ करवाना के बाद अग्रिम कार्यवाही करवाना चाहिए।हेड क्लर्क गोंविन्द मालवीय की कारनामे जिले के स्वास्थ्य कर्मचारी भलीभांति वाकिफ भी हैं।लेकिन चाहकर भी कुछ जरा भी मुंह नहीं खोल पाए।उक्त बड़े आला अफसरों की शह पर नोटशीट चलाना,कैश बिल रजिस्टर में गुपचुप तरीके से इंट्री कर करोड़ों की राशि गबन करने में पिछले 2 सालों से कर रहा था।अधिकारियों और एक असरदार शख्स के संरक्षण की वजह से वह हेड क्लर्क जो कि रिटायर्ड था।उसके तार घोटाले बाजों से जुड़े रहे।यही वह खास वजह रही कि इतनी बड़ी रकम गोलमाल कर दी गई।
नसीम खान संपादक






