करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद भी नहीं हो सके पर्यटक आकर्षित ।
सैकड़ों बार प्रयास के बाद भी नहीं हो सका ट्रेनो का स्टापेज।।

नसीम खान की रिपोर्ट
सांची,,, वैसे तो इस स्थल की अपने आप में प्राचीन ऐतिहासिकता एवं सभ्यता अपनी कहानी स्वयं बयां कर देती है यहां ढाई हजार साल पुराने ऐतिहासिक बौद्ध स्मारकों के साथ ही इस स्थल पर सम्राट अशोक का आशियाना हुआ करता था तथा कलिंग युद्ध के दौरान इस स्थल से ही सम्राट अशोक ने विश्व को शांति का संदेश दिया था इस स्थल पर अधिक से अधिक देशी विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करने सरकारों ने करोड़ों रुपए फूंक डाले बावजूद इसके इस स्थल पर पर्यटकों की संख्या में बृद्धि नहीं हो सकी । तथा इस स्थल पर पर्यटकों को आने जाने की सुविधा के लिए सैकड़ों प्रयास के बाद भी ट्रेनों का स्टापेज नहीं मिल सका । जिससे युवक अपने रोजगार की तलाश में यहां वहां भटकने मजबूर हो चुके हैं।
जानकारी के अनुसार इस स्थल की प्राचीनता लगभग ढ़ाई हजार साल पुरानी है तथा इस स्थल पर ढाई हजार साल पुराने बौद्ध स्मारक अपनी दुर्लभतम कलाकृति समेटे हुए है तथा प्राचीन धरोहर को संजोकर रखा गया है इसकी ऐतिहासिकता प्रसिद्ध है इस स्थल की प्रसिद्धि को देखते हुए ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस स्थल के प्राचीनतम बौद्ध स्मारकों को भारतीय करेंसी पर भी अंकित कर दिया जिससे अधिक से अधिक देशी विदेशी पर्यटकों को इस स्थल पर आकर्षित किया जा सके जिससे विभाग के साथ ही युवाओं को रोजगार के साधन उपलब्ध हो सके । इस स्थल को और अधिक सुंदर बनाने के लिए सरकारों ने करोड़ों रुपए खर्च कर डाले परन्तु इस स्थल में कोई बदलाव दिखाई नहीं दे सका तथा इस स्थल पर पर्यटकों की संख्या में बृद्धि के स्थान पर कमी ही दिखाई देने लगी इस स्थल की जिम्मेदारी सरकार ने पुरातत्व विभाग के जिम्मे की ही यहां तैनात पुरातत्व विभाग में अधिकारी कर्मचारियों के ऊपर सरकार लाखों करोड़ों खर्च कर रही है बावजूद इसके पर्यटकों से आय कम ही होती चली जा रही है इस स्थल पर पर्यटकों को लाने ले जाने न तो कोई विशेष वाहन सेवा ही उपलब्ध कराई जा सकी तथा कोराना के पूर्व इस स्थल पर अनेक ट्रेनों के स्टापेज हुआ करते थे जिन्हें कोराना से सुरक्षित रखने के नाम पर बंद करवा दिया गया तब से अब तक ट्रेन स्टापेज शुरू नहीं किये जा सके जबकि यह रेलवे स्टेशन जिलेभर का एक मात्र स्टेशन है जहां से पर्यटकों के साथ ही जिलेभर के लोगों को दूरदराज क्षेत्रों तक यात्रा करने की सुविधा थी परन्तु नागरिकों ने सैकड़ों बार ज्ञापन तथा यहां आने वाले अतिथियों से ट्रेनों के स्टापेज की मांग की थी परन्तु रेलवे विभाग के साथ ही अनेक विशिष्ट अतिविशिष्ट लोगों का आश्वासन तो मिला परन्तु वह भी मात्र कोरा साबित हुआ। इस स्थल से पर्यटकों के साथ ही अप-डाउनर्स भी परेशान दिखाई दे रहा है। यहां आने वाले पर्यटकों को इस स्थल की ऐतिहासिकता से रुबरु होकर नगर से 6 किमी दूर स्थित विश्व विख्यात स्थल उदयगिरि की गुफाओं के दर्शनार्थ आना जाना पड़ता था साथ ही लगभग 13 किमी दूर स्थित सत्धारा के बड़े बड़े प्राचीन बौद्ध स्मारक एवं सुनारी की पहाड़ी पर बौद्ध स्मारकों का अवलोकन हो जाता था तथा क्षेत्र में सभी प्राचीन स्थलों का अवलोकन कर पर्यटक अपने गंतव्य की ओर रवाना हो जाते थे परन्तु स्टापेज न होने से पर्यटकों का इस स्थल पर आना जाना थम सा गया है तब स्मारकों के रखरखाव पर खर्च अधिक एवं आय कम होने से सरकारों पर भार बढ़ गया है तथा जिले सहित आसपास क्षेत्र एवं नगर के लोगों को दूरदराज क्षेत्रों की यात्रा करने की सुविधा भी उपलब्ध नहीं हो पा सकी है तब दूरदराज यात्रा करने वालों को विदिशा भोपाल जैसे बड़े स्टेशनों से यात्रा करने की मशक्कत करनी पड़ती है । इस विख्यात स्थल पर नागरिकों ने सैकड़ों बार ट्रेन स्टापेज करने ज्ञापन सौपे परन्तु नतीजा कुछ नहीं निकल सका बताया जाता है ट्रेन स्टापेज को लेकर ज्ञापन के जवाब देते हुए रेलवे प्रशासन ने साफ कर दिया कि इस स्टेशन से आय कम होने के कारण स्टापेज असंभव है परन्तु प्रशासन को यह भी ध्यान रखना होगा कि स्टापेज करने के बाद ही आय का आंकलन किया जाना चाहिए । वैसे तो कहा जाता है कि इस प्रदेश व देश में डबल इंजन सरकार चल रही है तथा इस क्षेत्र के विधायक स्वयं प्रदेश सरकार में स्वास्थ्य मंत्री का रोल निभा रहे हैं तथा सांसद के रूप में रमाकांत भार्गव क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे। बावजूद इसके विश्व विख्यात पर्यटक स्थल टेनों के स्टापेज के लिए तरसने पर मजबूर हो रही है।

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