नसीम खान संपादक
सांची,,, वैसे तो देशभर में स्वच्छ भारत का संदेश देकर इस अभियान से गांव गांव शहर शहर को स्वच्छ बनाने का संकल्प सरकारों ने लिया था बड़े जोर शोर से स्वच्छ भारत का नारा देते हुए इस अभियान पर करोड़ों अरबों रुपए भेंट चढ़ गए बावजूद इसके जमीनी हकीकत से न तो गांव शहर स्वच्छता का जामा पहन सके न ही स्वच्छता अभियान ज़मीन पर उतर सका । गांव गांव शहर शहर आज भी गंदगी की चपेट में जकडे हुए साफ़ दिखाई दे जाते हैं।
जानकारी के अनुसार कुछ वर्षों पूर्व इस देश को स्वच्छता का जामा पहनाने की कवायद ज़ोर शोर से शुरू की गई थी तथा भारत सरकार सहित प्रदेश सरकारों ने स्वच्छ भारत का संदेश देते हुए गांव गांव शहर शहर को सुंदर बनाने अभियान चलाया तथा इस अभियान को सफल बनाने के लिए हर जगह स्वच्छता के नारों से पाट दिया गया तथा इस अभियान पर सरकारों ने करोड़ों अरबों रुपए इस अभियान को सफल बनाने में आवंटित कर दिए तथा इस अभियान का आंकलन करने सरकारों ने अपनी टीम भी भेजी परन्तु यह अभियान धरातल पर उतरने से पहले ही दम तोड चुका तथा स्वच्छता के नाम पर लाखों करोड़ों रुपए का चूना लगाया गया इतना ही नहीं समय-समय पर सरकारी राशि को चूना लगाने के मामले भी सामने आते रहे तथा इनकी जांच पड़ताल भी चलती रही परन्तु सेवा शुल्क के नाम पर अनाप-शनाप खरीद फरोख्त तथा अनाप-शनाप खर्च से सफेद कागज काले होते चले गए परन्तु नतीजा न तो लिप्त लोगों पर कार्रवाई न ही किसी भी प्रकार की वसूली ही हो सकी तथा सरकारी राशि का बड़े पैमाने पर गोलमाल का खेल चलता रहा न ही इस पर अंकुश लगाने में ही सरकारें आगे बढ़ सकी जिसका नतीजा नगर गांव शहर सभी गंदगी की चपेट में जकड़े रहे तथा गंदगी से हालात बद से बद्तर हो चुके । यही हाल इस ऐतिहासिक स्थली का भी बना दिया गया इस नगर में भी स्वच्छता के नाम पर लाखों करोड़ों की बलि चढ़ गई तथा फर्जी ख़रीद फरोख्त भी खूब चर्चित हुई एवं इस अभियान की चर्चा भी बाजार में देखने सुनने को मिलती रही बावजूद इसके जमीनी हकीकत अपनी बदहाली को बयां करती दिखाई देती रही इस ओर गंभीरता से न तो सरकारों ने न ही इस अभियान को चलाने वालों को ही सुध लेने की फुर्सत मिल सकी जिसका खामियाजा लोगों को गंभीर बीमारियों से जूझते हुए अस्पतालों के चक्कर लगाने मजबूर होना पड़ रहा है । इस स्थल पर हालात बद से बद्तर हो चुके हैं सड़कों पर जगह जगह कचरों के ढेर राष्ट्रीय राजमार्ग किनारे भी गंदगी पसरी दिखाई दे रही है तब इस स्थल के भीतरी हालत बद से बद्तर हो चुके हैं गढ्डों में गंदगी भरी कीचड़ दल-दल मच्छरों का भारी प्रकोप विभिन्न बीमारियों का फैलाव से लोगों में बैचैनी बढ़ गई है तथा इन हालात की सुध लेने वाला कोई दिखाई नहीं दे रहा है जबकि इन दिनों विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहें हैं तब जिम्मेदारों ने अपने विकास गिनाने तो शुरू कर दिए परन्तु विकास कहा किया गया किसी को पता नहीं चल सका । तथा लोगों में खासी नाराजगी भी देखी जा रही है इतना ही नहीं कोई सुनने देखने वाला भी नहीं दिखाई देता है ।






