नसीम खान
महर्षि दयानंद सरस्वती का व्यक्तित्व एवं शिक्षा दर्शन पर चर्चा
सांची बौद्ध-भारतीय ज्ञान अध्ययन विश्वविद्यालय में महर्षि दयानंद सरस्वती की 200वीं जयंती पर समारोह आयोजित किया गया। आर्श गुरुकुल महाविद्यालय नर्मदा पुरम् के आचार्य स्वामी ऋतस्पति ने महर्षि दयानंद सरस्वती का व्यक्तित्व एवं शिक्षा दर्शन पर मुख्य वक्तव्य दिया। उन्होने दयानंद सरस्वती के जीवन के विभिन्न पहलुओं की चर्चा करते हुए उनके जीवन वृत्त और उसमें सत्य की अडिगता पर बात की। उन्होने कहा कि महर्षि दयानंद ने व्यवहार भानु ग्रंथ में शिक्षा पर भी अपने विचार व्यक्त किये हैं। उनका जोर विद्या की प्राप्ति और अविद्या को दूर करने पर रहता था।
अध्यक्षीय उद्बोधन देते हुए कुलगुरु प्रोफेसर वैद्यनाथ लाभ ने कहा कि वेदों की शुद्धता, शुद्ध चरित्र और आदर्श जीवन का स्वरुप बताते हुए महर्षि दयानंद सरस्वती ने अपना जीवन जीया। वे एक महान दार्शनिक, समाज सुधारक, अस्पृश्यता का विरोध करने वाले और राष्ट्र को स्वतंत्र कराने का आव्हान करने वाले दिव्य आत्मा थे। कुलगुरु महोदय ने बताया कि महर्षि दयानंद सरस्वती वैश्विक ज्ञान के स्त्रोत थे और सत्य के प्रति उनका आग्रह हमें बहुत प्रेरित करता है।
सांची विवि के संस्कृत एवं वेद विभाग द्वारा आयोजित कार्यक्रम में अधिष्ठाता डॉ नवीन कुमार मेहता ने धन्यवाद प्रस्ताव देते हुए महर्षि दयानंद सरस्वती के व्यक्तित्व को सहज, सरल और सुलभ बताते हुए सत्य के प्रति संकल्पित बताया। स्वामी ऋतस्पति ने कुलगुरु प्रो वैद्यनाथ लाभ को किताबें भेंट की। कार्यक्रम शांतिपाठ के साथ सम्पन्न हुआ।






