बेजुबान दुधारू पशुओं को मौत के मुंह में ढकेल रहे पशुमालिक ।रात मे सडको पर लगते पशुओं के झुंड ।

नसीम खान
सांची,,, वैसे तो गायो को माता माना जाता है तथा गाय धार्मिक रूप में भी पूज्य मानी जाती है परन्तु इन माताओं के दूध से प्रेम है जबकि इन बेजुबान पशुओं से प्रेम उठ चुका है यही कारण रहता है इनका दूध तो दह लिया जाता है इसके बाद इन्हें भगवान भरोसे खुल्ला छोड़ मौत से जूझने छोड दिया जाता है ।जिससे दिनभर खाद्य दुकानों पर मुंह मारने वाले पशु रात होते ही सडको को अपना ठिकाना बना लेते हैं तथा रात के अंधेरे में वाहनों की चपेट में आकर या तो दम तोड़ देते है अथवा तडपते दिखाई दे जाते है ।
जानकारी के अनुसार गाय एक ऐसा पशु होता है जिससे बिटामिन युक्त दूध उपलब्ध होता है जो स्वास्थ्य वर्धक माना जाता है वैसे भी गाय धार्मिक मान्यता अनुसार पूज्य माता के रूप में जाना जाता है तथा गाय की पूजा भी की जाती हैं परन्तु इसके पालन हार दूध दोह लेते हैं तथा भगवान भरोसे छोड़ देते हैं जिससे इन बेजुबान पशु अपना पेट भरने इधर उधर भटकते दिखाई देते है तथा दिनभर खाद्य पदार्थों के दुकानों के आसपास मंडराने लगते है तथा कागज पन्नी से अपनी भूख मिटाते हैं तथा पन्नी से अपने आप मौत के मुंह में पहुंचने की तैयारी शुरू कर देते है तथा रात होते ही मच्छरों से अपना बचाव करने सडको पर झुंड के रूप में डेरा जमा लेते हैं ।परन्तु पशुमालिक बेखबर बने रहते हैं ।वैसे भी भोपाल विदिशा मार्ग पर छोड़ बडे वाहनों की तेज रफ्तार दौडभाग लगी रहतीं है इस मार्ग से जितने भी गांव होते है उनके सामने सैकड़ो की संख्या के पशु डेरा जमा कर अपना ठिकाना बना लेते है अनेक बार रात के अंधेरे में यह पशु अज्ञात तेजरफ्तार वाहनों की चपेट में आ जाने से असमय काल के गाल मे समा जाते है अथवा घायलावस्था मे तडपते दिखाई देते है इतना ही है जब कभी वाहन चालक मौके पर पकड़ा भी जाते है तो लोग उसपर टूट पडते हैं तथा कानून को अपने हाथ से धज्जियाँ उडा देते हैं ।जबकि शासन प्रशासन अनेक बार पशुमालिको के चेतावनी तक दे चुका तथा पशुमालिको पर कार्यवाही की चेतावनी तक दे दी गई परन्तु इन चेतावनी का असर पशुमालिको पर नही हो सका ।समय समय पर जब इन आवारा पशुओं को गौशालाओं मे भेजा जाता हैं तब वह भी रात होते ही छोडकर अपना पल्ला झाड़ लेते हैं आखिर यह बेजुबान पशु कहा जाये तथा कैसे अपना पेट भरे तथा वाहन चालक इस परेशानी से कैसे निपटें सवाल खड़े होते है ।।हालांकि सरकार ने घायल पशुओ को पशु चिकित्सालयों को घायल पशुओ को लाकर उपचार करने वाहन भी उपलब्ध किये गए परन्तु यह वाहन यहां वहां खडे तो दिखाई दे जाते है परन्तु कभी घायल पशुओ को उठा कर अस्पताल तक भेजने के काम नही आ पाते तथा शोपीस बनकर रह जाते है ।इन बेजुबान पशुओ की रक्षा के लिए शासन प्रशासन को कडे कदम उठा कर कडी कार्यवाही कर ने की जरुरत मेहसूस की जा रही हैं तब ही पशु भी सुरक्षित रह सकेंगे तथा वाहन चालक भी राहत की सांस ले सकेगें।

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