नसीम खान
सब्जी मंहगाई ने फिर पकडी रफ्तार ।सब्जी खाना भी हुआ मंहगा ।
सांची,,, खाद्य पदार्थों सहित सब्जी के बढते दामो से लोगों को मंहगाई का मार झेलनी पड़ रही है परन्तु इस बढती मंहगाई पर प्रशासन की नहीं पड पा रही नजर जिससे खाद्य पदार्थों की मंहगाई से तो लोग जूझ ही रहे थे अब सब्जी के बढते दामों ने भी रसोई मे खलबली मचा दी है ।
जानकारी के अनुसार लगातार बढती मंहगाई से लोग खासे परेशान नजर आ रहे थे कि अब हरी सब्जी के दाम भी आसमान छूने लगे है जिससे मंहगाई ने इस मंहगे दौर मे आम आदमी की कमर तोड दी है आज नगर के हाटबाजार मे टमाटर जो दस रुपये किलो हुआ करता था अस्सी एवं सौ तक पहुंच गया इसके साथ ही गिलकी जो बीस रुपये हुआ करती थीं चालीस एवं प्याज जो बीस थी वह साठ एवं आलू बीस के स्थान पर पचास रुपये किलो पहुंच गए हैं ऐसे ही अन्य हरी सब्जी लगभग दोगने दाम छूने लगी है ।पहले से ही खाद्य पदार्थों की बढती कीमतों ने आम आदमी की कमर तोड़ दी है उसके साथ ही अब हरी सब्जियों ने भी मंहगे दामों की रफ्तार पकड़ ली है इससे आम आदमी को सोचने पर मजबूर होना पड रहा है ।जबकि नौकरी पेशा लोगों को सरकार मंहगाई भत्ता दरे देकर राहत पहुंचा देती हैं परन्तु आम आदमी इस बढते मंहगाई के बोझ तले दबता ही जा रहा है सरकारें गरीबों को तो कुछ राहत पहुंचा ही देती हैं परंतु इन सबका सीधा असर मध्यम वर्ग के लोगों पर सीधा पड रहा है जिससे मध्यम वर्गीय परिवार क्या खायें क्या न खायें की तर्ज पर मंहगाई की मार झेलने पर मजबूर हो उठे हैं अब हरी सब्जियों के बढते दामों से रसोई का संचालन करने वाली महिलाओं पर भी सीधा असर पड़ता दिखाई दे रहा है लगातार दिनों दिन बढती मंहगाई ने आम आदमी का पेट भरना भी दुश्वार कर दिया है हालांकि सरकारें बडे बडे वायदे तो करती दिखाई दे रही हैं परन्तु मंहगाई पर लगाम लगाने कोई कदम ही भी नहीं उठा पा रही हैं । लगातार बढती मंहगाई ने लोगों का जीवन बेहाल कर दिया है ।जबकि गरीब पर इस बढती घटती मंहगाई का कोई असर नहीं पडता तथा अमीरों को मंहगाई से कोई सरोकार नहीं रहता इस बढती मंहगाई का सीधा असर मध्यम वर्गीय परिवारों को झेलना पड़ता है तथा इस बढती मंहगाई के बोझ तले यह परिवार दबते ही चले जा रहे है हालांकि सरकारों ने खाद्य विभागों को अस्तित्व में लाकर खाद्य पदार्थों पर निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी थी परन्तु खाद्य अमले को इससे कोई सरोकार नहीं रहा तथा खाद्य विभाग महीनों में चक्कर लगाते दिखाई देते है वह भी मात्र अपनी जेबें भरने तक ही सिमट कर रह जाते है सम्बन्धित विभागों को न तो बढती मंहगाई न ही घटती मंहगाई से ही कोई सरोकार ही रहता है ।बहरहाल लोगों को इस बढती मंहगाई ने सीधा असर डाल दिया है जिससे रसोई प्रभावित हो रही हैं रसोई में रहने वाली महिलाओं को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है तथा लोग शासन प्रशासन पर दिनों दिन बढती मंहगाई के सवाल खड़े कर रहे हैं ।






