रिपोर्ट : राजर्षि मिश्रा (Live khabar india)
उमरिया जिले के मानपुर विकासखंड अंतर्गत शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय चिल्हारी में विद्यार्थियों के लिए बनाई जा रही तीन प्रयोगशालाओं के निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। निर्माण कार्य में कथित तौर पर निर्धारित मापदंडों के विपरीत सामग्री के इस्तेमाल के आरोप सामने आए हैं। ग्रामीणों ने निर्माण में घटिया गुणवत्ता की लाल ईंट, लोहा और सीमेंट के उपयोग का आरोप लगाते हुए पूरे मामले की तकनीकी जांच की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि लाखों रुपये की लागत से विद्यार्थियों के लिए तैयार की जा रही इन प्रयोगशालाओं के निर्माण में यदि निर्माण सामग्री की गुणवत्ता से समझौता किया गया, तो भविष्य में भवन की मजबूती पर असर पड़ सकता है। ऐसे में निर्माण कार्य की शुरुआत से ही गुणवत्ता की निगरानी और तकनीकी जांच बेहद जरूरी है।
तीन प्रयोगशालाओं के निर्माण पर उठे सवाल
जानकारी के अनुसार चिल्हारी स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में विद्यार्थियों की सुविधा के लिए तीन प्रयोगशालाओं का निर्माण कराया जा रहा है। इन भवनों के निर्माण को लेकर ग्रामीणों ने सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि निर्माण कार्य में कथित रूप से मानक के अनुरूप सामग्री का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार निर्माण स्थल पर इस्तेमाल की जा रही ईंटों की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल हैं। इसके अलावा निर्माण में लगाए जा रहे लोहे और सीमेंट की गुणवत्ता की भी जांच किए जाने की मांग की गई है।
हालांकि निर्माण कार्य की वास्तविक गुणवत्ता और सामग्री निर्धारित तकनीकी मापदंडों के अनुरूप है या नहीं, इसका अंतिम निर्धारण संबंधित तकनीकी जांच के बाद ही किया जा सकता है।

ग्रामीणों ने की तकनीकी जांच की मांग
निर्माण कार्य को लेकर ग्रामीणों ने संबंधित विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से मौके पर पहुंचकर पूरे निर्माण की तकनीकी जांच कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण में उपयोग की जा रही सामग्री के नमूने लेकर उनकी गुणवत्ता की जांच कराई जानी चाहिए।
ग्रामीणों की मांग है कि यदि जांच में निर्माण कार्य में किसी तरह की अनियमितता या लापरवाही सामने आती है तो संबंधित ठेकेदार के साथ-साथ जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जाए और नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
निरीक्षण में लाल ईंट और तिरछे कॉलम मिलने की बात
मामले में ग्रामीण यांत्रिकी सेवा के एसडीओ अनिल इनवाती ने बताया कि वे निर्माण स्थल का निरीक्षण करने पहुंचे थे। उनके अनुसार मौके पर निर्माण कार्य में लाल ईंट का उपयोग किया जा रहा था। निरीक्षण के दौरान कुछ कॉलम तिरछे पाए गए और निर्माण सामग्री भी निर्धारित मानक के अनुरूप नहीं पाई गई।
एसडीओ अनिल इनवाती के मुताबिक उन्होंने मौके पर ही ठेकेदार को निर्माण कार्य बंद करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही किए गए निर्माण कार्य को पूरी तरह तोड़कर निर्धारित मापदंडों के अनुसार दोबारा निर्माण करने के निर्देश दिए गए हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि निर्माण कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और गुणवत्ता के साथ समझौता नहीं होने दिया जाएगा।
निर्माण की गुणवत्ता पर जिम्मेदारी किसकी?
मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि लाखों रुपये की लागत से तैयार हो रही इन प्रयोगशालाओं के निर्माण कार्य की गुणवत्ता की निगरानी की जिम्मेदारी किस अधिकारी और विभाग की है? क्या निर्माण कार्य के दौरान नियमित रूप से तकनीकी अधिकारियों द्वारा निरीक्षण किया जा रहा था?

यदि निरीक्षण के दौरान निर्माण कार्य में मानकों की अनदेखी पाई गई है, तो यह भी जांच का विषय है कि निर्माण कार्य शुरू होने से लेकर वर्तमान स्थिति तक संबंधित अधिकारियों द्वारा कितनी बार स्थल का निरीक्षण किया गया।
विद्यार्थियों की सुरक्षा से जुड़ा मामला
विद्यालय में बनाई जा रही प्रयोगशालाएं सीधे तौर पर विद्यार्थियों के उपयोग में आने वाली हैं। ऐसे में भवन की मजबूती और निर्माण की गुणवत्ता बेहद महत्वपूर्ण है। प्रयोगशाला भवन में विद्यार्थियों और शिक्षकों की आवाजाही होती है, इसलिए निर्माण में इस्तेमाल होने वाली ईंट, सीमेंट, सरिया और अन्य सामग्री की गुणवत्ता निर्धारित मानकों के अनुरूप होना जरूरी है।
ग्रामीणों का कहना है
सरकारी राशि से होने वाले निर्माण कार्य में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में किसी तरह की परेशानी सामने न आए।
जांच के बाद सामने आएगी वास्तविक स्थिति
फिलहाल निर्माण कार्य को लेकर ग्रामीणों की शिकायत और विभागीय अधिकारी के निरीक्षण में सामने आई कमियों के बाद मामले ने गंभीर रूप ले लिया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विभाग द्वारा निर्माण सामग्री और किए गए निर्माण की तकनीकी जांच किस स्तर पर कराई जाती है और जांच रिपोर्ट में क्या तथ्य सामने आते हैं।
यदि तकनीकी जांच में निर्माण कार्य में निर्धारित मापदंडों की अनदेखी की पुष्टि होती है, तो संबंधित जिम्मेदारों पर नियमानुसार कार्रवाई की जरूरत होगी। वहीं यदि सामग्री और निर्माण मानकों के अनुरूप पाए जाते हैं, तो इससे भी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
फिलहाल एसडीओ द्वारा निर्माण कार्य बंद कराने और निर्धारित मापदंडों के अनुसार दोबारा निर्माण कराने के निर्देश दिए जाने की बात सामने आई है।





