डेंगू के मामले बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक किसी भी उम्र के लोगों में देखने को मिल सकते हैं। इसलिए इसके लक्षणों को पहचानना और शुरुआती दिनों में चिकित्सकीय सलाह लेना बेहद जरूरी है।
क्या है डेंगू?
डेंगू एक वायरल बीमारी है, जो संक्रमित एडीज मच्छर के काटने से फैलती है। यह मच्छर आमतौर पर सुबह और शाम के समय अधिक सक्रिय रहता है। डेंगू के वायरस के चार प्रकार होते हैं और एक बार संक्रमण होने के बाद भी व्यक्ति को दूसरे प्रकार के वायरस से दोबारा डेंगू हो सकता है।
डेंगू के प्रमुख लक्षण
तेज बुखार (104 डिग्री फारेनहाइट तक)
सिरदर्द और आंखों के पीछे दर्द
जोड़ों और मांसपेशियों में तेज दर्द
शरीर पर लाल चकत्ते या दाने
अत्यधिक कमजोरी और थकान
मतली और उल्टी
भूख कम लगना
प्लेटलेट्स की संख्या में कमी
गंभीर मामलों में मसूड़ों या नाक से खून आना
कब करानी चाहिए जांच?
यदि तेज बुखार के साथ डेंगू के लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। बीमारी के शुरुआती दिनों में NS1 टेस्ट कराया जा सकता है। इसके अलावा चिकित्सक की सलाह के अनुसार अन्य रक्त जांच भी कराई जाती हैं।
डेंगू होने पर क्या करें?
पर्याप्त मात्रा में पानी और तरल पदार्थ लें।
डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाओं का सेवन करें।
आराम करें और शरीर को हाइड्रेट रखें।
प्लेटलेट्स कम होने या गंभीर लक्षण दिखाई देने पर तुरंत अस्पताल जाएं।
बिना चिकित्सकीय सलाह के कोई भी दवा न लें।
डेंगू से बचाव कैसे करें?
घर के आसपास पानी जमा न होने दें।
कूलर, गमले और पानी की टंकियों की नियमित सफाई करें।
मच्छरदानी और मच्छर भगाने वाले उत्पादों का उपयोग करें।
पूरी बाजू के कपड़े पहनें।
बच्चों को मच्छरों से बचाने के लिए विशेष सावधानी बरतें।
क्या घरेलू उपाय मददगार हो सकते हैं?
कुछ पारंपरिक उपाय जैसे गिलोय या तुलसी का उपयोग सामान्य स्वास्थ्य और पर्याप्त तरल पदार्थ लेने में सहायक हो सकते हैं, लेकिन इन्हें डेंगू के इलाज का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। डेंगू होने पर सबसे महत्वपूर्ण है समय पर जांच, डॉक्टर की सलाह और उचित चिकित्सकीय देखभाल।
कब हो जाएं सतर्क?
यदि रोगी को लगातार उल्टी, सांस लेने में तकलीफ, अत्यधिक कमजोरी, पेट दर्द या खून आने जैसे लक्षण दिखाई दें तो इसे गंभीर स्थिति माना जा सकता है। ऐसे में तुरंत अस्पताल पहुंचना चाहिए।
डेंगू एक गंभीर बीमारी है, लेकिन समय पर पहचान और सही उपचार से इससे होने वाली जटिलताओं से काफी हद तक बचा जा सकता है। सावधानी ही इसका सबसे बड़ा बचाव है।







