रिपोर्ट: अजय अहिरवार |Live khabar india
भोपाल। मध्यप्रदेश को वर्ष 2047 तक विकसित और समृद्ध राज्य बनाने के लक्ष्य के साथ भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में ‘समृद्ध मध्यप्रदेश @ 2047’ राज्य स्तरीय कॉन्क्लेव का आयोजन किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कॉन्क्लेव का शुभारंभ करते हुए प्रदेश के विकास को नई दिशा देने वाला रोडमैप प्रस्तुत किया।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि मध्यप्रदेश के विकास के लिए सरकार को शिक्षा, कौशल, तकनीक, नवाचार और संस्थागत सहयोग को एक साथ आगे बढ़ाना होगा। इसी उद्देश्य से उन्होंने ‘एक संस्थान-एक संकल्प’ की थीम के तहत प्रदेश के विकास में देश के प्रमुख केंद्रीय संस्थानों की भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
130 से अधिक केंद्रीय संस्थानों के साथ साझेदारी पर जोर
‘समृद्ध मध्यप्रदेश @ 2047’ के विजन को जमीन पर उतारने के लिए प्रदेश सरकार ने देश के प्रमुख केंद्रीय वित्त पोषित संस्थानों के साथ मिलकर काम करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। मुख्यमंत्री ने बताया कि IIT, IIM, AIIMS सहित 130 से अधिक केंद्रीय संस्थानों की विशेषज्ञता और संसाधनों का लाभ प्रदेश के विकास में लिया जा सकता है।
मुख्यमंत्री का जोर इस बात पर रहा कि मध्यप्रदेश की विकास यात्रा केवल सरकारी योजनाओं तक सीमित न रहे, बल्कि शिक्षण संस्थानों, विशेषज्ञों, उद्योगों और युवाओं की सक्रिय भागीदारी से इसे व्यापक बनाया जाए।
‘Skill’ को बताया नई मुद्रा
कॉन्क्लेव में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बदलती अर्थव्यवस्था में युवाओं के कौशल की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि कौशल नई मुद्रा है। उनका संदेश साफ था कि आने वाले समय में रोजगार और आर्थिक विकास के लिए केवल डिग्री पर्याप्त नहीं होगी, बल्कि युवाओं के पास आधुनिक तकनीक और उद्योग की जरूरतों के अनुरूप कौशल होना जरूरी है।
सरकार का फोकस युवाओं को रोजगार के अवसरों से जोड़ने के साथ-साथ उन्हें भविष्य की अर्थव्यवस्था के लिए तैयार करने पर भी है।
Innovation को बताया नई अर्थव्यवस्था
मुख्यमंत्री ने Innovation यानी नवाचार को नई अर्थव्यवस्था का आधार बताया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में नए विचारों, तकनीकी प्रयोगों और अनुसंधान को बढ़ावा देने की जरूरत है।
‘समृद्ध मध्यप्रदेश @ 2047’ के विजन में नवाचार को प्रमुख स्थान देकर प्रदेश के युवाओं और संस्थानों को नई तकनीकों के साथ जोड़ने की दिशा में काम करने का संकेत दिया गया है।
‘एक संस्थान-एक संकल्प’ से विकास को गति देने की तैयारी
कॉन्क्लेव की प्रमुख थीम ‘एक संस्थान-एक संकल्प’ रही। इसका उद्देश्य प्रदेश के विकास के लिए विभिन्न केंद्रीय संस्थानों की विशेषज्ञता को विशिष्ट क्षेत्रों से जोड़ना है।
IIT जैसे तकनीकी संस्थान तकनीकी नवाचार और अनुसंधान में सहयोग कर सकते हैं, जबकि IIM जैसे संस्थानों की विशेषज्ञता प्रबंधन और उद्यमिता के क्षेत्र में उपयोगी हो सकती है। इसी तरह चिकित्सा और स्वास्थ्य क्षेत्र के प्रमुख संस्थानों के सहयोग से स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर बनाने की दिशा में काम किया जा सकता है।
सुशासन संस्थान और केंद्रीय संस्थानों के बीच MoU
कार्यक्रम के दौरान सुशासन संस्थान तथा विभिन्न केंद्रीय संस्थानों के बीच एमओयू का आदान-प्रदान भी किया गया। इन समझौतों को प्रदेश के विकास के लिए विशेषज्ञता और संस्थागत सहयोग बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
एमओयू के माध्यम से शोध, प्रशिक्षण, नीति निर्माण, नवाचार और विभिन्न विकासात्मक क्षेत्रों में सहयोग के नए रास्ते खुलने की उम्मीद है।
‘समृद्ध मध्यप्रदेश @ 2047’ स्मारिका का विमोचन
कार्यक्रम में ‘समृद्ध मध्यप्रदेश @ 2047’ स्मारिका का विमोचन भी किया गया। यह विजन दस्तावेज और उससे जुड़ी पहल प्रदेश को दीर्घकालिक विकास की दिशा में आगे ले जाने के प्रयासों को रेखांकित करती है।
मुख्यमंत्री ने केंद्रीय संस्थानों के प्रमुखों और विशेषज्ञों के साथ संवाद करते हुए मध्यप्रदेश की विकास क्षमता, भविष्य की जरूरतों और 2047 तक राज्य को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की रणनीति पर चर्चा की।
2047 के लक्ष्य पर नजर
‘समृद्ध मध्यप्रदेश @ 2047’ का मूल उद्देश्य प्रदेश के विकास को दीर्घकालिक दृष्टि से आगे बढ़ाना है। इसके तहत शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास, नवाचार, तकनीक, सुशासन और संस्थागत सहयोग जैसे क्षेत्रों को विकास की आधारशिला बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
कॉन्क्लेव में सामने आया विजन इस बात का संकेत है कि मध्यप्रदेश सरकार आने वाले वर्षों में सरकार और संस्थानों के सहयोग से विकास का नया मॉडल तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहती है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने केंद्रीय संस्थानों के प्रमुखों से संवाद करते हुए प्रदेश के विकास में सभी की भागीदारी का आह्वान किया। अब इस रोडमैप को धरातल पर उतारना और अलग-अलग क्षेत्रों में इसके परिणाम दिखाई देना ‘समृद्ध मध्यप्रदेश @ 2047’ की सफलता की सबसे बड़ी कसौटी होगी।





