नसीम खान
सांची को बताया शांति, करुणा और आध्यात्मिकता का अद्भुत केंद्र, लाइट एंड साउंड शो में जीवंत हुआ बौद्ध इतिहास
सांची,,, विश्व धरोहर सांची की समृद्ध बौद्ध विरासत, प्राचीन स्थापत्य कला और भगवान बुद्ध के शांति एवं करुणा के संदेश से ब्रिक्स देशों से पहुंचे प्रतिनिधि अभिभूत नजर आए। शनिवार को ब्राजील, चीन, दक्षिण अफ्रीका, संयुक्त अरब अमीरात, इंडोनेशिया, रूस सहित विभिन्न देशों के 42 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने सांची के ऐतिहासिक स्मारकों का भ्रमण कर हजारों वर्ष पुरानी भारतीय संस्कृति एवं स्थापत्य कला को करीब से देखा। देर रात स्तूप परिसर में आयोजित लाइट एंड साउंड शो के माध्यम से प्रतिनिधियों ने बौद्ध इतिहास, संस्कृति और भगवान बुद्ध के जीवन दर्शन का जीवंत अनुभव भी किया।
प्रतिनिधिमंडल ने प्राचीन स्तूपों, तोरण द्वारों, स्तंभों तथा पत्थरों पर उकेरी गई बौद्ध संस्कृति एवं कलाकृतियों का बारीकी से अवलोकन किया। विशेषज्ञों ने प्रतिनिधियों को सांची की स्थापत्य कला, तोरण द्वारों पर अंकित नक्काशी, बौद्ध परंपराओं, जातक कथाओं तथा पशु-पक्षियों के दृश्यों की विस्तार से जानकारी दी। मौर्य सम्राट अशोक के काल से लेकर वर्तमान समय तक सांची के विकास और इसके ऐतिहासिक महत्व से भी प्रतिनिधियों को अवगत कराया गया।
तोरण द्वारों पर उकेरी गई बारीक नक्काशी और प्राचीन शिल्पकला ने प्रतिनिधियों को विशेष रूप से आकर्षित किया। उन्होंने इन ऐतिहासिक कलाकृतियों को अपने कैमरों में कैद किया। आज दल के सदस्यों ने भगवान बुद्ध के परमशिष्य सारिपुत्र महामोद्ग्लायन की पवित्र अस्थियों के भी दर्शन किए इस अवसर पर बौद्ध मंदिर में महाबोधि सोसायटी के प्रभारी भिक्षु विमलतिस्स नायक थैरो सहित अन्य भिक्षु उपस्थित रहे। प्रतिनिधियों ने कहा कि सांची की यात्रा उनके लिए अविस्मरणीय अनुभव है, जिसे वे हमेशा याद रखेंगे। उन्होंने सांची को केवल ऐतिहासिक धरोहर ही नहीं, बल्कि विश्व शांति, आध्यात्मिकता, करुणा और मानवता का संदेश देने वाला अद्भुत केंद्र बताया।





