अमेरिका-ईरान युद्ध फिर भड़का: होर्मुज बंद होने से तेल संकट गहराया, अमेरिकी ठिकानों पर हमले का दावा

US-Iran Conflict: ईरान पर अमेरिका के दो बड़े हमले, होर्मुज संकट से बढ़ीं तेल की कीमतें

Trump on Iran: ‘समझौते के लिए बेताब है ईरान’, युद्ध के बीच बड़ा दावा

आर्टिकल : नसीम खान

पश्चिम एशिया में एक बार फिर युद्ध की आग भड़क उठी है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता सैन्य तनाव अब वैश्विक चिंता का विषय बन गया है। अमेरिका ने ईरान के तटीय रक्षा ठिकानों और मिसाइल भंडारण स्थलों पर दो चरणों में बड़े हमले किए हैं, जबकि ईरान ने इसे अमेरिका के साथ “अस्तित्व की लड़ाई” करार दिया है। इस बीच होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के बंद होने की घोषणा के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें एक महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, भारतीय समयानुसार सुबह करीब 3:30 बजे ईरान के ग्रेटर टुंब द्वीप (Greater Tunb Island) पर स्थित तटीय रक्षा प्रणाली और क्रूज मिसाइल भंडारण केंद्रों को निशाना बनाया गया। अमेरिकी सेना का कहना है कि यह ऑपरेशन लगभग 90 मिनट तक चला। इसके करीब नौ घंटे बाद अमेरिका ने दूसरी बार भी सैन्य कार्रवाई की।

तेल टैंकर को किया निष्क्रिय

अमेरिकी सेना ने दावा किया है कि उसने खर्ग द्वीप (Kharg Island) की ओर जा रहे एक तेल टैंकर को कई बार चेतावनी दी थी, लेकिन उसके नहीं रुकने पर उसे मिसाइल हमले के जरिए निष्क्रिय कर दिया गया। खर्ग द्वीप ईरान के तेल निर्यात का प्रमुख केंद्र माना जाता है, ऐसे में इस कार्रवाई का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी पड़ सकता है।

होर्मुज बंद होने से दुनिया में बढ़ी चिंता

ईरान ने कुछ दिन पहले होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने का ऐलान किया था। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक है, जहां से युद्ध से पहले वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा गुजरता था। इसके बंद होने से तेल की कीमतों में तेजी देखी गई और कई देशों ने ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता जाहिर की है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो दुनिया के कई देशों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर सीधा असर पड़ सकता है।

ईरान का पलटवार, अमेरिकी ठिकानों पर हमले का दावा

ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया है कि उसने बहरीन, कुवैत और जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो पाई है।

वहीं, कुवैत सरकार ने बयान जारी कर कहा कि उसने ईरान की ओर से दागी गई चार मिसाइलों और 21 ड्रोन को सफलतापूर्वक मार गिराया। इस हमले में कुछ संपत्तियों को नुकसान पहुंचा, लेकिन किसी के घायल होने की सूचना नहीं है।

अस्पताल के पास हमले का आरोप

ईरान की सरकारी मीडिया के अनुसार, अहवाज शहर के चार इलाकों और बंदर अब्बास में भी हमले हुए हैं। सरकारी प्रसारक आईआरआईबी (IRIB) ने दावा किया कि अहवाज के एक अस्पताल के पास हमला हुआ, जहां बच्चों के कैंसर का इलाज किया जाता है। घटना के बाद अस्पताल को एहतियातन खाली कराया गया।

हालांकि, इन दावों को लेकर अभी तक अमेरिकी पक्ष की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

ट्रंप बोले- समझौते के लिए तैयार है ईरान

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान जल्द ही अपनी स्थिति को समझेगा और वह समझौते के लिए “बेहद उत्सुक” है। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब दोनों देशों के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है।

दूसरी ओर, ईरान के शीर्ष वार्ताकार मोहम्मद बागेर गालीबाफ ने कहा कि देश की सुरक्षा होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवस्था बनाए रखने पर निर्भर करती है और ईरान अपनी संप्रभुता से कोई समझौता नहीं करेगा।

अमेरिकी नागरिक को रिहा किया

तनाव के बीच एक सकारात्मक खबर भी सामने आई है। ईरान ने अपनी हिरासत में रखी गई एक अमेरिकी नागरिक को रिहा कर दिया है। माना जा रहा है कि यह कदम भविष्य में संभावित कूटनीतिक बातचीत का संकेत हो सकता है।

क्या होगा आगे?

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और बढ़ता है तो इसका असर केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था, तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर भी पड़ेगा। होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं।

फिलहाल, दोनों देशों की ओर से आक्रामक बयानबाजी जारी है और आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या यह संघर्ष कूटनीतिक समाधान की ओर बढ़ता है या फिर क्षेत्र एक बड़े युद्ध की ओर बढ़ जाएगा।

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