ऐतिहासिक स्थल का रेलवे स्टेशन बना ऐतिहासिक। मगर पसरा रहता सन्नाटा

नसीम खान संपादक
ट्रेनों का स्टापेज न होने से नहीं रहते यात्री
सांची,,, वैसे तो इस स्थल के रेलवे स्टेशन का कायाकल्प बदल डाला गया परन्तु यह तब निरर्थक साबित हो जाता है जब सैकड़ों ज्ञापन सौंपने के बाद भी इस स्टेशन पर ट्रेन स्टापेज नहीं हो सका जिससे लोगों को तो परेशानी उठानी ही पड़ती है वरन् ट्रेनों के लिए पर्यटकों को भी समस्या से जूझना पड़ता है।
जानकारी के अनुसार यह स्थल विश्व प्रसिद्ध पर्यटक स्थल के रूप में विख्यात है यहां सैकड़ों की संख्या में पर्यटकों की आवाजाही लगी रहती है इतना ही नहीं इस स्थल पर अक्सर विशिष्ट अति विशिष्ट लोगों का आना जाना लगा रहता है यहां तक कि इस स्थल पर पूर्व में जो ट्रेन स्टापेज हुआ करते थे तथा रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की बड़ी संख्या में आवाजाही हुआ करती थी परन्तु ट्रेनों के स्टापेज बन्द होने के साथ ही रेलवे स्टेशन पर सन्नाटा पसरा दिखाई देता है।उन्हें रेलवे प्रशासन द्वारा कोरोना महामारी के चलते स्थगित कर दिया गया है परन्तु कोरोना की तो पूरी तरह से बिदाई हो गई वरन् लंबा अंतराल गुजरने के बाद भी इस विख्यात पर्यटक स्थल को ट्रेनों का स्टापेज पुनः बहाल नहीं हो सका ट्रेनों के स्टापेज न होने से इस स्थल पर सबसे बड़ी परेशानी यहां शिक्षा ग्रहण करने वाले छात्रों को तो उठानी ही पड़ रही है बल्कि इस स्थल पर व्यवसाई भी अपने व्यवसाय चलाने परेशानी से जूझ रहे हैं इतना ही नहीं इस स्थल पर आने वाले पर्यटकों को भी खासी परेशानी हो रही है जिससे देशी विदेशी पर्यटकों को को तब परेशानी होती है जब इस स्थल पर आने जाने की समस्या से दोचार होना पड़ता है इस के साथ ही इस स्थल पर आने जाने वाले अपडाउनर्स भी खासी परेशानी से जूझ रहे हैं । हालांकि इस स्थल को देश के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र भाई मोदी ने भी गंभीरता से लेते हुए विश्व में और अधिक प्रचारित करने एवं विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करने भारतीय करेंसी दो सो रुपए को नोट पर भी ऐतिहासिकता प्रचारित करने कोई कौर कसर नहीं छोड़ी । इस मामले को लेकर नगर परिषद प्रशासन अध्यक्ष पप्पू रेवाराम के नेतृत्व में रेलवे अधिकारियों का ध्यान इसकी प्रसिद्धि की ओर दिलाया तथा इस स्थल पर ट्रेनों के स्टापेज न होने से रेलवे के जिम्मेदारों को ज्ञापन देकर मांग की गई कि यहां पूर्व की भांति ट्रेनों के स्टापेज बहाल किए जाने चाहिए जिससे इस स्थल पर पर्यटको की संख्या में बृद्धि हो सके एवं लोगों को रोजगार उपलब्ध हो सके साथ ही आय के स्त्रोत बढ़ सकें । इसके साथ ही व्यापारियों एवं अपडाउनर्स एसोसिएशन ने भी अपनी समस्या से रेल अधिकारियों को अवगत कराया इसके साथ ही अनेक संगठनों ने भी अपने अपने स्तर पर स्टापेज के ज्ञापन सौंपकर मांग की इतना ही नहीं इस क्षेत्र के माननीय सांसद ने यहां ट्रेनों के स्टापेज की मुहिम में शामिल होते हुए लोकसभा में इस मुद्दे को उठा डाला इन सबके बावजूद लोगों को स्टापेज तो नहीं मिल सका बल्कि रेलवे प्रशासन ने इस स्थल के रेलवे स्टेशन का कायाकल्प बदल दिया तथा इसे आधुनिक स्टेशन बनाने मे लाखों करोड़ों खर्च कर दिए परन्तु यह तब निरर्थक साबित हो गये जब यहां देशी विदेशी पर्यटकों को ट्रेनों के स्टापेज न होने से स्टेशन पहुंचने का अवसर ही नहीं मिल सका ।तब पर्यटकों सहित छात्र छात्राओं अपडाउनर्स व्यापारियों पर्यटकों को बसों से यात्रा करने पर मजबूर होना पड़ गया तथा मनमाने किराया से आर्थिक बोझ झेलने पर मजबूर होना पड़ा इतना ही नहीं इस स्थल का रेलवे स्टेशन जिले भर का एक मात्र रेलवे स्टेशन कहलाता है यहां से जिले भर के लोगों को लंबी दूरी की यात्रा करने इस स्थल के रेलवे स्टेशन से मिलती है परन्तु इस ऐतिहासिक स्थल का दुर्भाग्य ही कहा जा सकता है कि रेल विभाग इस विश्व विख्यात पर्यटक स्थल पर सुविधा उपलब्ध कराने में कहीं न कहीं असफल साबित हो रहा है जिससे रेलवे की आय तो प्रभावित हो ही रही है बल्कि इस स्थल को रेलवे प्रशासन सुविधा उपलब्ध कराने में असफल साबित हो चुका है जबकि इस स्थल को विकास का जामा पहनाने में सरकारें लाखों करोड़ों खर्च कर रही है जिससे इस स्थल को सुंदर बनाया जा सके एवं पर्यटकों को इस स्थल की ओर आकर्षित किया जा सके बावजूद इसके रेल विभाग इस स्थल की प्रसिद्धि को दरकिनार करते हुए स्टापेज सुविधा से वंचित किये हुए हैं तब रेलवे स्टेशन का कायाकल्प मात्र दिखावा साबित हो रहा है कब तक रेल विभाग इस स्थल की प्रसिद्धि को गंभीरता से लेकर स्टापेज की सुविधा उपलब्ध करायेगा कहा नहीं जा सकता ।

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