नसीम खान
सांची,,, बारिश का मौसम शुरू होते ही नगर सहित ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े स्तर पर पौधरोपण अभियान शुरू हो गया है। सरकारी एवं निजी संस्थाओं के साथ ही सामाजिक संगठनों द्वारा भी बड़ी संख्या में पौधे रोपे जा रहे हैं। प्रधानमंत्री के संदेश ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत भी लोगों को पौधरोपण के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
हर वर्ष पौधरोपण के दौरान हजारों की संख्या में विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाए जाते हैं। पौधरोपण कार्यक्रमों का प्रचार-प्रसार भी बड़े स्तर पर किया जाता है और क्षेत्र को हराभरा बनाने का संकल्प लिया जाता है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि पौधे लगाने के बाद उनकी देखरेख कौन करेगा।
अक्सर पौधरोपण कार्यक्रम समाप्त होने के बाद पौधों की ओर पलटकर देखने की फुरसत किसी को नहीं मिल पाती। न नियमित पानी मिल पाता है और न ही पौधों की सुरक्षा की पर्याप्त व्यवस्था हो पाती है। परिणामस्वरूप लगाए गए अनेक पौधे कुछ समय बाद ही नष्ट हो जाते हैं। ऐसे में पौधरोपण पर खर्च होने वाली राशि और पूरी कवायद का उद्देश्य भी अधूरा रह जाता है।
पौधरोपण निश्चित रूप से पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है, लेकिन केवल पौधे लगा देने से क्षेत्र हराभरा नहीं बन सकता। पौधे को सुरक्षित रखना, समय-समय पर पानी देना, मवेशियों से बचाना और उसके विकास की निगरानी करना भी उतना ही जरूरी है तभी पौधरोपण कार्यक्रम सफल हो सकेगा।तथा क्षेत्र हराभरा बन सकेगा।





