नसीम खान
सांची,,,, नगर से गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग को फोरलेन में तब्दील किए जाने की सुगबुगाहट ने मार्ग के दायरे में आने वाले सैकड़ों भवन मालिकों की चिंता बढ़ा दी है। प्रस्तावित फोरलेन की जद में आने वाले भवनों को लेकर लोगों में एक बार फिर तोड़फोड़ की आशंका के चलते हड़कंप की स्थिति बनने लगी है। बताया जा रहा है कि निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है और संबंधित भवन मालिकों को विभाग की ओर से नोटिस जारी किए जाने की तैयारी है।
जानकारी के अनुसार कुछ वर्ष पूर्व ही नगर से टूलेन राष्ट्रीय राजमार्ग का निर्माण किया गया था। उस दौरान सड़क की सीमा में आने वाले कई मकानों और दुकानों को हटाया गया था। सड़क निर्माण पूरा होने के बाद लोगों ने किसी तरह अपने मकान और कारोबार व्यवस्थित किए थे। अभी इस निर्माण को लगभग पांच वर्ष ही हुए हैं कि उसी मार्ग पर फोरलेन निर्माण की चर्चा ने लोगों की चिंता फिर बढ़ा दी है।
करोड़ों के निर्माण पर भी उठने लगे सवाल
फोरलेन निर्माण को लेकर सबसे बड़ा सवाल यह भी उठ रहा है कि टूलेन निर्माण के बाद नगर में विभिन्न विकास कार्यों पर खर्च की गई बड़ी राशि का क्या होगा। नगर परिषद द्वारा हाल ही में लगभग पौने तीन करोड़ रुपये की लागत से नाला निर्माण कराया गया है। वहीं लगभग 22 लाख रुपये की लागत से मुख्य मार्ग से सटकर सुलभ कॉम्प्लेक्स का निर्माण भी शुरू किया गया है, जिसकी नींव का कार्य पूरा हो चुका है।
इसके अलावा राष्ट्रीय राजमार्ग से संबंधित विभाग द्वारा भी नालियों और स्ट्रीट लाइट सहित अन्य कार्यों पर राशि खर्च की गई है। ऐसे में यदि प्रस्तावित फोरलेन की सीमा में ये निर्माण आते हैं तो इन पर खर्च हुई सरकारी राशि के प्रभावित होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। लोगों का कहना है कि फोरलेन की योजना की चर्चा लंबे समय से थी, ऐसे में निर्माण कार्यों की स्वीकृति और स्थान चयन के दौरान भविष्य की सड़क योजना को ध्यान में रखा जाना चाहिए था।
भवन बचाने की रणनीति पर आज बैठक
फोरलेन के नक्शे की चर्चा तेज होने के बाद मार्ग के किनारे रहने वाले भवन मालिक अब अपने मकानों और दुकानों को बचाने की रणनीति तैयार करने में जुट गए हैं। इसी मुद्दे को लेकर गुरुवार शाम शिवमंदिर चौराहे पर बैठक आयोजित करने का आह्वान किया गया है। बैठक में फोरलेन की प्रस्तावित सीमा, प्रभावित होने वाले भवनों और आगे की रणनीति पर चर्चा होने की संभावना है। जरूरत पड़ने पर भवन मालिकों द्वारा आंदोलन की रूपरेखा तैयार किए जाने की भी संभावना जताई जा रही है।





