बीएमओ दीवान के राज में लापरवाही चरम पर — जयसिंहनगर स्वास्थ्य केंद्र में अव्यवस्थाओं का अंबार ।


रिपोर्टर@ दीपक कुमार गर्ग | शहडोल
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जयसिंहनगर, जहां स्वास्थ्य सेवाओं की उम्मीद लेकर मरीज पहुंचते हैं, आज खुद लापरवाही और अनदेखी का शिकार बना हुआ है। खंड चिकित्सा अधिकारी (बीएमओ) एल. दीवान की अगुवाई में स्वास्थ्य केंद्र की स्थिति दिन-ब-दिन बदतर होती जा रही है। व्यवस्थाएं मात्र कागजों पर दिखाई देती हैं, जबकि ज़मीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट है।

बड़ी इमारत, बदहाल व्यवस्था

50 बिस्तरों वाले विस्तारित भवन का निर्माण तो पूरे शानो-शौकत के साथ किया गया, लेकिन इसकी देखरेख और साफ-सफाई की जिम्मेदारी शायद किसी की नहीं। हाल ही में केंद्र की गंदगी और अव्यवस्था को लेकर समाचार प्रकाशित हुआ था, जिसके बाद स्थानीय पत्रकारों और जागरूक नागरिकों के दबाव में बीएमओ एल. दीवान हरकत में आए। सवाल ये उठता है कि क्या हर बार उन्हें जगाने के लिए कोई और ही आगे आएगा?

स्वास्थ्य केंद्र से बाहर निवास क्यों?

बीएमओ का पद मरीजों की सुविधाओं की निगरानी और प्रबंधन के लिए होता है। ऐसे में यह सवाल उठना लाज़मी है कि श्री दीवान स्वयं अस्पताल परिसर में रहने की बजाय बाहर किराए के कमरे में क्यों रहते हैं? अगर वे खुद ही सुविधा और आराम को प्राथमिकता देंगे, तो अधीनस्थ कर्मचारियों से जवाबदेही की उम्मीद कैसे की जा सकती है?

फोन न उठाना, जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ना

केंद्र में तैनात डॉक्टरों का रवैया भी कम लापरवाह नहीं है। आपात स्थिति में भी डॉक्टर फोन नहीं उठाते, और जब इस बारे में बीएमओ से शिकायत की जाती है, तो वे अपना पल्ला झाड़ते हुए कहते हैं — “मैं क्या कर सकता हूं?” जब प्रशासनिक मुखिया ही अपनी जिम्मेदारी से पीछे हटने लगे, तो फिर आम नागरिक किससे उम्मीद करें?

रात की ड्यूटी में ‘आराम’

सूत्रों के अनुसार, रात्रिकालीन ड्यूटी के दौरान डॉक्टर मरीजों को देखने की बजाय अपने कमरों में आराम करते पाए जाते हैं। मरीजों को या तो अस्पताल स्टाफ से डॉक्टर को बुलवाना पड़ता है या खुद उनके कमरे तक जाना होता है। सवाल उठता है कि जब डॉक्टरों की ड्यूटी लगाई ही गई है, तो उनकी जिम्मेदारी का पालन क्यों नहीं कराया जा रहा?

बीते दिनों की मिसाल, आज का सन्नाटा

एक समय डॉक्टर राजेश तिवारी, बीएमओ रहते हुए अस्पताल की संपूर्ण व्यवस्था को प्रभावी ढंग से संभालते थे। लेकिन अब पद से हटने के बाद उनका व्यवहार भी काफी बदल गया है। वे न केवल पत्रकारों के फोन तक नहीं उठाते, बल्कि आम लोगों की समस्याओं को भी नज़रअंदाज़ करते हैं। लंबे समय से एक ही स्थान पर पदस्थ रहना शायद उन्हें ज़िम्मेदारी से अधिक विशेषाधिकार का एहसास देने लगा है।



जयसिंहनगर का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, जो जनता की सेवा का केंद्र बिंदु होना चाहिए, आज अव्यवस्था और प्रशासनिक लापरवाही का प्रतीक बन गया है। आवश्यकता है कि उच्च स्तर पर इस मामले को गंभीरता से लिया जाए और बीएमओ सहित समस्त जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली की निष्पक्ष जांच की जाए, ताकि मरीजों को उनका अधिकार — सम्मानजनक स्वास्थ्य सेवा — मिल सके।


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