विदिशा में है मिनी जगन्नाथ पुरी , जहां देश भर से आते हैं श्रद्धालु

विदिशा रिपोर्टर :आसिफ खान

“ओडिशा की जगन्नाथ पुरी तो आपने देखी होगी… लेकिन क्या आप जानते हैं कि मध्यप्रदेश के विदिशा जिले में भी एक ऐसी जगह है, जिसे ‘मिनी जगन्नाथपुरी’ कहा जाता है? जहां करीब 200 साल से भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और माता सुभद्रा की भव्य रथ यात्रा निकलती है… और इस यात्रा में शामिल होने के लिए लाखों श्रद्धालु उमड़ पड़ते हैं। आखिर क्या है इस परंपरा के पीछे की अनोखी मान्यता… देखिए हमारी ये खास रिपोर्ट।”


ढोल-नगाड़ों की गूंज…
“जय जगन्नाथ” के जयकारे…
और आस्था के सागर में डूबा पूरा मानोरा धाम…

विदिशा जिले का यह छोटा सा गांव आज किसी तीर्थ नगरी से कम नजर नहीं आ रहा। भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा अपने भक्तों को दर्शन देने रथ पर सवार होकर नगर भ्रमण के लिए निकल पड़े हैं।


मानोरा धाम को यूं ही ‘मिनी जगन्नाथपुरी’ नहीं कहा जाता। करीब दो सौ वर्षों से यहां यह परंपरा लगातार निभाई जा रही है।

धार्मिक मान्यता है कि भगवान जगन्नाथ ने अपने परम भक्त मानिकचंद और उनकी पत्नी को हर वर्ष स्वयं यहां आने का वचन दिया था। तभी से हर आषाढ़ माह में यह भव्य रथ यात्रा निकाली जाती है, जिसे देखने और रथ की रस्सी खींचने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं।


मान्यता है कि जो श्रद्धालु भगवान के रथ की रस्सी खींचता है, उसके जीवन के कष्ट दूर होते हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। यही वजह है कि लाखों श्रद्धालु इस ऐतिहासिक यात्रा का हिस्सा बनने के लिए मानोरा धाम पहुंचते हैं।


श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन भी पूरी तरह सतर्क है। सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। हाईवे और आसपास के मार्गों पर ट्रैफिक डायवर्ट किया गया है ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो और यात्रा शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके।

“करीब दो सौ वर्षों से चली आ रही यह परंपरा आज भी उसी श्रद्धा और भव्यता के साथ जीवंत है। मानोरा धाम की यह रथ यात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आस्था, विश्वास और संस्कृति का ऐसा संगम है, जो हर साल लाखों लोगों को एक सूत्र में बांध देता है।”

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