आईएसबीएस सम्मेलन का समापन, साँची विवि को अंतरराष्ट्रीय बनाने पीएम से मिलेंगे थैरो

नसीमखान सांची

साँची बौद्ध भारतीय ज्ञान अध्ययन विश्वविद्यालय में इंडियन सोसायटी फॉर बुद्धिस्ट स्टडीज़ का रजत जयंती समारोह सम्पन्न हो गया। सम्मेलन में 80 से ज्यादा शोध पत्र पढ़े गये और 150 बौद्ध दर्शन, संस्कृति और पालि भाषा के विद्वान शामिल हुए। सम्मेलन में वियतनाम से पूज्य भिक्षु थिक नॉट टू शामिल हुए। साँची विवि के कुलगुरु प्रो वैद्यनाथ लाभ पर एक अभिनंदन ग्रंथ का विमोचन भी आईएसबीएस में हुआ एवं उन्हें लाइफटाइम अचिवमेंट अवॉर्ड भी दिया गया। कुलगुरु ने साँची विश्वविद्यालय के प्रथम दीक्षांत समारोह में वेनेगला उपतिस्स नायका थेरो को डी लिट मानद उपाधि देने का भी फैसला किया।

मुख्य अतिथि महाबोधि सोसायटी ऑफ श्रीलंका के वेनेगला उपतिस्स नायका थेरो ने हिन्दी में साँची से अपने जुड़ाव और बौद्ध धर्म की व्याख्या की पूरे मंच और दर्शकों-श्रोताओं ने सराहना की। वो साँची के स्कूल में पढ़े, कॉलेज एस.एस जैन विदिशा से किया और भोपाल के बरकतुल्ला विश्वविद्यालय के प्रथम बैच के छात्र रहे। उन्होंने कहा कि साँची विश्वविद्यालय को अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय बनाए जाने के लिए वो प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी से मिलेंगे। उन्होंने इस संबंध में एक पत्र भी लिखा है। वेनेगला उपतिस्स थैरो ने कहा कि वो प्रधानमंत्री श्री मोदी से कहेंगे कि वो इसे और अधिक विस्तार दें कि ये अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय बन जाए।

साँची विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. वैद्यनाथ लाभ ने कहा कि अगर साँची विश्वविद्यालय अपने अंतरराष्ट्रीय स्वरूप में आ जाएगा तो पूरे विश्व से बौद्ध और वैदिक अध्ययन के विद्यार्थी, शोधार्थी उच्च शिक्षा के लिए यहां आ सकेंगे। कुलगुरु ने बौद्ध धर्म को सभी धर्मों का निचोड़ बताया।

वेनेगला थैरो ने कहा कि भारत में रहकर उन्होंने अनेकता में एकता को जीया है, सीखा है। थैरो ने कहा कि मैंने बुद्ध की शिक्षाओं के माध्यम से भारत में ही सीखा कि हम सब इंसान हैं। सबको देखो और मुस्कुरा दो। थोड़ा सिर झुका दो तो पूरा विश्व आपके साथ हो जाएगा। उन्होंने बताया कि महाबोधि सोसायटी में लोगों से मुस्कुरा कर मिलने से ही वो जापान में पहला थैरवाद मंदिर स्थापित कर पाए। सभी धर्मों के प्रति उनके व्यवहार से ही सऊदी अरब में जाने वाले वो पहले बौद्ध भिक्षु बने। उन्होंने कहा कि किसी भी धर्म का कोई स्कूल नहीं होना चाहिए बल्कि स्कूल ऐसे होने चाहिए जिसमें सभी धर्मों के लोग मिलकर पढ़ें ताकि अपनी संस्कृतियां साझा कर सकें। उन्होंने कहा कि वेटिकन के पोप जो अमेरिका के राष्ट्रपति से भी नहीं मिलते उनसे मिलने कोलंबो में उनके महाविहार में आए थे।

अपने उद्बोधन में आई.एस.बी.एस के अध्यक्ष प्रो. एस.पी शर्मा ने कहा कि बुद्ध की शिक्षाओं का वेनेगला उपतिस्स थैरो ने पूरा ग्रहण किया है और वो संप्रदायवाद तथा क्षेत्रवाद से ऊपर उठकर पूरे विश्व के कल्याण के लिए सोचने वाले मानवतावादी हैं। प्रो. शर्मा ने कहा कि ज्ञान गोपनीय होता तो नष्ट हो जाता। जितना हम ज्ञान का प्रचार करेंगे उतना ही इसका संवर्धन होगा। उन्होंने कहा कि बुद्ध के ज्ञान को आई.एस.बी.एस संवर्धित करने का प्रयास करता है।

शोधार्थियों और छात्रों से प्रो. शर्मा ने कहा कि अकादमिक जगत में भाषा साहित्यिक अर्थात शिष्ट भाषा होनी चाहिए। आई.एस.बी.एस की सचिव प्रो. शास्वती मुतसुद्दी ने तीन दिवसीय अकादमिक समारोह से जुड़ी कॉन्फ्रेंस रिपोर्ट पेश की। उन्होंने साँची विश्वविद्यालय में आई.एस.बी.एस के स्थानीय सचिव व सहायक प्राध्यापक डॉ. संतोष प्रियदर्शी को धन्यवाद ज्ञापित किया। धन्यवाद ज्ञापन में उपकुलसचिव श्री विवेक पाण्डेय ने सभी मंचासीन के अलावा साँची विश्वविद्यालय परिवार के प्रत्येक सदस्य को सफल आयोजन के लिए धन्यवाद दिया।

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