छात्रों की सुरक्षा के नाम पर बनाए गए घटिया गतिआवरोधक बने दुर्घटनाओं और लोगों की नींद उड़ने का कारण।राष्ट्रीय राजमार्ग पर संकेतक बोर्डों की कमी, अवैज्ञानिक गतिआवरोधक और विभागीय लापरवाही से बढ़ा हादसों का खतरा

नसीमखान सांची
सांची,,
विश्व प्रसिद्ध ऐतिहासिक स्थल सांची से गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग पर छात्रों की सुरक्षा के उद्देश्य से बनाए गए गतिआवरोधक अब वाहन चालकों और नगरवासियों के लिए गंभीर परेशानी का कारण बनते जा रहे हैं। मार्ग पर न तो गति नियंत्रण के लिए आवश्यक सांकेतिक बोर्ड लगाए गए हैं और न ही आबादी व स्कूली क्षेत्र को लेकर कोई ठोस सुरक्षा व्यवस्था की गई है।
जानकारी के अनुसार राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण के बाद इस मार्ग पर भारी एवं तेज रफ्तार वाहनों की संख्या हजारों में पहुँच चुकी है। बावजूद इसके विभाग एवं निर्माण एजेंसी द्वारा कहीं भी गति सीमा, स्कूल जोन अथवा आबादी क्षेत्र के चेतावनी संकेत नहीं लगाए गए। इसका नतीजा यह है कि आए दिन दुर्घटनाएँ हो रही हैं।
हाल ही में रात्रि के समय दो भारी ट्रकों की आपस में टक्कर हो गई, जिससे न केवल वाहनों को नुकसान पहुँचा बल्कि सड़क किनारे लगी सरकारी लोहे की रेलिंग भी क्षतिग्रस्त हो गई। हादसे के बाद मार्ग पर लंबा जाम लग गया। पुलिस को मौके पर पहुँचकर काफी मशक्कत के बाद यातायात बहाल कराना पड़ा।
सबसे चिंताजनक स्थिति स्कूली बच्चों की है। इस मार्ग पर कई सरकारी एवं निजी विद्यालय स्थित हैं, जहाँ हजारों छात्र-छात्राएँ अध्ययनरत हैं। तेज रफ्तार वाहनों के कारण बच्चों को सड़क पार करना जोखिम भरा हो गया है। कई बार छात्र हाथों के इशारों से वाहन चालकों से रुकने की मिन्नत करते नजर आते हैं, जबकि नियमों के अनुसार स्कूल क्षेत्र में स्पष्ट चेतावनी बोर्ड और नियंत्रित गति आवश्यक है।
नगरवासियों की मांग पर विभाग ने सरकारी स्कूल के पास गतिआवरोधक तो बनाए, लेकिन उनकी गुणवत्ता बेहद घटिया बताई जा रही है। अवैज्ञानिक बनावट के कारण वाहन चालकों को दूर से गतिआवरोधक का आभास नहीं होता और तेज रफ्तार में गुजरते वाहनों से जोरदार आवाज होती है। इससे न केवल दुर्घटनाएँ हो रही हैं, बल्कि रातभर लोगों की नींद भी उचट रही है। कई बार लोग हादसे की आशंका में घरों से बाहर निकलने को मजबूर हो जाते हैं।
राष्ट्रीय राजमार्ग पर सुरक्षा के नाम पर करोड़ों रुपये की लागत से लगाई गई लोहे की रेलिंग भी लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं कर पा रही है। दुर्घटनाओं में रेलिंग टूट रही है, जिससे सरकारी धन का नुकसान हो रहा है। वहीं कई स्थानों से रेलिंग चोरी हो जाने के कारण मार्ग और अधिक असुरक्षित हो गया है।
हालांकि नागरिकों द्वारा बार-बार गतिआवरोधकों को सुधारने और मार्ग पर संकेतक बोर्ड लगाने की मांग की जा चुकी है। पूर्व में जिला कलेक्टर द्वारा भी स्कूलों एवं आबादी क्षेत्रों में सांकेतिक बोर्ड लगाने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन विभाग ने इन आदेशों को गंभीरता से नहीं लिया।
इनका कहना है।।
“घटिया गतिआवरोधक के कारण दुर्घटनाएँ हो रही हैं और लोगों की नींद भी खराब हो रही है। इस संबंध में हम विधायक जी से चर्चा करेंगे।” — संजीत वर्मा, भाजपा नेता
“रात में गतिआवरोधक नजर नहीं आते, तेज आवाज से लोग बाहर निकलने को मजबूर होते हैं। प्रशासन को तुरंत सुधार करना चाहिए।” — अंकित मेहतो, ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष
“घटिया गतिआवरोधक लोगों का सिरदर्द बन चुके हैं, लेकिन विभाग ध्यान नहीं दे रहा।” — विवेक तिवारी, पार्षद
“स्कूल के पास गतिआवरोधक जरूरी हैं, लेकिन वैज्ञानिक तरीके से बनने चाहिए।” — आर.एस. यादव, सपा नेता
करोड़ों की लागत से बने राष्ट्रीय राजमार्ग पर यदि सुरक्षा के बुनियादी इंतजाम ही न हों, तो यह विकास नहीं बल्कि जानलेवा लापरवाही का प्रमाण बन जाता है।

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