नसीमखान सांची
सांची,,,
नगर में नलजल योजना के नाम पर पक्की सड़कों की अंधाधुंध खुदाई का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। योजना का उद्देश्य भले ही घर-घर जल पहुंचाना बताया जा रहा हो, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि लंबा समय बीत जाने के बावजूद आज भी कई वार्डों में लोगों को नियमित जल आपूर्ति नहीं मिल पा रही है, जबकि नगर की कीमती पक्की सड़कें पूरी तरह उखाड़ दी गई हैं।
जानकारी के अनुसार कछुआ गति से चल रही नलजल योजना के तहत नगरभर में लाखों रुपए की लागत से बनी सड़कों को जगह-जगह खोद दिया गया है। खुदाई के बाद न तो समय पर मरम्मत की जा रही है और न ही सुरक्षा के कोई इंतजाम किए गए हैं। परिणामस्वरूप नागरिकों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, वहीं दोपहिया वाहन चालकों, बुजुर्गों और स्कूली बच्चों के लिए यह स्थिति जानलेवा साबित हो सकती है।
नियमानुसार किसी भी विभाग द्वारा सार्वजनिक सड़क की खुदाई किए जाने पर उसे उसी गुणवत्ता और मजबूती के साथ पुनः निर्माण करना अनिवार्य होता है। लेकिन सांची में नलजल योजना के नाम पर सड़कें खोदकर छोड़ दी जा रही हैं, जिससे सड़कें मटियामेट हो चुकी हैं और दुर्घटनाओं की आशंका लगातार बनी हुई है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि कई स्थानों पर रात के समय गड्ढे दिखाई नहीं देते, जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
इस संबंध में नलजल योजना के इंजीनियर श्री आकाश ने सफाई देते हुए कहा,
“योजना अंतर्गत पाइपलाइन बिछाने हेतु खुदाई की गई है, जिन सड़कों की खुदाई हुई है उन्हें शीघ्र ही ठीक करवा दिया जाएगा।”
हालांकि लोगों का सवाल यह है कि जब तक सड़कों की हालत नहीं सुधरती, तब तक जिम्मेदारी किसकी होगी—योजना की या प्रशासन की?
घर-घर जल पहुंचाने की मंशा सराहनीय है, लेकिन उसके नाम पर सांची की सड़कों और नागरिकों की सुरक्षा से किया जा रहा खिलवाड़ अब बर्दाश्त के बाहर होता जा रहा है।






