नसीमखान सांची
सांची,,
निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता सूची को पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाने के उद्देश्य से लागू की गई विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया अब विवादों में घिरती नजर आ रही है। सांची विधानसभा क्षेत्र में दावे–आपत्तियों के नाम पर जिस तरह से चुनिंदा समुदाय को निशाना बनाया जा रहा है, उसने पूरे क्षेत्र में भारी आक्रोश और खलबली पैदा कर दी है।
आरोप है कि मतदाता सूची सुधार की इस प्रक्रिया का दुरुपयोग कर विशेषकर अल्पसंख्यक समुदाय के मतदाताओं को योजनाबद्ध तरीके से परेशान किया जा रहा है। दूर-दराज के क्षेत्रों के लोगों के नाम से सैकड़ों-हजारों आपत्तियां दर्ज कराई जा रही हैं, जिनका वास्तविकता से कोई लेना-देना नहीं है। इसके चलते निर्दोष मतदाता बार-बार बीएलओ और सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं।
इसी गंभीर मामले को लेकर ब्लॉक कांग्रेस सांची ने जिला निर्वाचन अधिकारी एवं कलेक्टर के नाम ज्ञापन नायब तहसीलदार सांची श्री ललित सक्सेना को सौंपा। ज्ञापन में स्पष्ट शब्दों में कहा गया है कि एसआईआर प्रक्रिया अब पारदर्शिता नहीं, बल्कि उत्पीड़न का माध्यम बनती जा रही है।
कांग्रेस का आरोप है कि सांची विधानसभा क्षेत्र में हजारों मतदाताओं के नामों पर फर्जी और संदिग्ध आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं, जिनका उद्देश्य मतदाता सूची से एक समुदाय विशेष को बाहर करना प्रतीत होता है।
ज्ञापन में मांग की गई है कि ऐसे सभी आपत्तिकर्ताओं की तत्काल जांच की जाए और यदि आपत्तियां झूठी या फर्जी पाई जाती हैं, तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए। कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने इस गंभीर मामले में निष्पक्ष और सख्त कदम नहीं उठाए, तो ब्लॉक कांग्रेस को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा। ज्ञापन की प्रतिलिपि मध्यप्रदेश निर्वाचन आयोग एवं भारत निर्वाचन आयोग को भी भेजी गई है।
इस संबंध में नायब तहसीलदार सांची श्री ललित सक्सेना ने कहा,
“ज्ञापन प्राप्त हुआ है, जिसे आवश्यक कार्रवाई हेतु जिला निर्वाचन अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किया जा रहा है।”
ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष श्री अंकित मेहतो ने तीखे शब्दों में कहा,
“एक विशेष समुदाय के मतदाताओं के नामों पर जिस तरह से संदेहास्पद आपत्तियां दर्ज की जा रही हैं, वह लोकतंत्र की आत्मा पर चोट है। यदि इसकी निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो यह साबित हो जाएगा कि मतदाता सूची से लोगों को जानबूझकर बाहर करने की कोशिश हो रही है।”
जनपद पंचायत सदस्य प्रतिनिधि श्री रामबाबू सराठे ने एक गंभीर उदाहरण देते हुए बताया कि जनपद पंचायत क्षेत्र अंतर्गत ग्राम बांसखेड़ा में लगभग 12 दर्जन मतदाताओं के नामों पर एक ही समुदाय को लेकर आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं।
उन्होंने कहा,
“जब हमने कथित आपत्तिकर्ता से संपर्क किया तो उसने साफ इनकार कर दिया और कहा कि उसके नाम से किसी ने फर्जी आपत्ति दर्ज की है। यह सीधे-सीधे धोखाधड़ी है और हम इस मामले में जिला निर्वाचन अधिकारी से सख्त कार्रवाई की मांग करते हैं।”
मतदाता सूची में कथित फर्जीवाड़े के ये आरोप अब केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि लोकतंत्र की निष्पक्षता की अग्निपरीक्षा बन चुके हैं।






