नसीमखान सांची
पर्यटन नगरी की छवि पर सवाल, सख्त पुलिसिंग से रसूखदारों में बेचैनी।
सांची,,,विश्व प्रसिद्ध ऐतिहासिक एवं बौद्ध तीर्थ स्थल सांची, जहां देश-विदेश से पर्यटक और श्रद्धालु पहुंचते हैं, इन दिनों गंभीर आरोपों के चलते चर्चा में है। पर्यटकों के ठहरने के नाम पर संचालित कुछ होटल और लॉज अवैध गतिविधियों, विशेषकर देह व्यापार के अड्डों में तब्दील होने के आरोपों से घिरे हुए हैं। इससे न केवल इस ऐतिहासिक स्थल की गरिमा प्रभावित हो रही है, बल्कि सामाजिक वातावरण पर भी नकारात्मक असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
जानकारी के अनुसार, सांची में पिछले लंबे समय से जुआ, सट्टा और अवैध शराब जैसी गतिविधियां पनप रही थीं। हालांकि, थाना प्रभारी जेपी त्रिपाठी के पदभार संभालने के बाद इन अवैध कारोबारों पर सख्ती से कार्रवाई करते हुए कई प्रकरण दर्ज किए गए और असामाजिक तत्वों पर अंकुश लगाया गया। पुलिस द्वारा होटल-लॉज संचालकों को भी स्पष्ट चेतावनी दी गई है।
इसी बीच एक होटल में युवाओं और कर्मचारियों के बीच मारपीट और तोड़फोड़ की घटना सामने आई, जिसमें पुलिस ने होटल कर्मचारियों की शिकायत पर युवाओं के खिलाफ मामला दर्ज कर उन्हें हिरासत में लिया। इसी दौरान राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के एक सदस्य के थाने पहुंचने पर एक युवक को नियमविरुद्ध बैठाए जाने पर आपत्ति जताई गई और जांच शुरू की गई। इस घटनाक्रम ने मामला और तूल पकड़ लिया तथा थाना प्रभारी के खिलाफ कार्रवाई की चर्चाएं भी तेज हो गईं।
बाजार में इस पूरे घटनाक्रम को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है। कई लोग इसे सख्त पुलिसिंग के खिलाफ रसूखदारों की प्रतिक्रिया मान रहे हैं। वहीं थाना प्रभारी जेपी त्रिपाठी ने स्पष्ट किया है कि क्षेत्र में कानून का राज कायम रखा जाएगा और जनता के विश्वास को हर हाल में मजबूत किया जाएगा।
जनता की राय:
व्यापारी महासंघ अध्यक्ष संतोष दुबे का कहना है कि पुलिस की कार्यप्रणाली सख्त होनी चाहिए, ताकि अपराधों पर नियंत्रण हो सके। उन्होंने बस स्टैंड क्षेत्र के होटल-लॉज में चल रही अवैध गतिविधियों पर भी कड़ी कार्रवाई की मांग की।
ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष अंकित मेहतो ने कहा कि नगर में कानून का राज हर स्थिति में कायम रहना चाहिए और पुलिस को जनता का विश्वास बनाए रखना जरूरी है।
वहीं सपा नेता आर.एस. यादव ने पुलिस की सख्ती की सराहना करते हुए कहा कि इससे अपराधियों में डर का माहौल बना है, लेकिन होटल-लॉज में हो रही गतिविधियों पर भी प्रभावी कार्रवाई की आवश्यकता है।
सांची की ऐतिहासिक पहचान को बचाए रखने के लिए अब सख्त कार्रवाई और सतत निगरानी ही सबसे बड़ा सवाल बनकर सामने है।





