नसीमखान सांची
हरियाली खत्म होने से बढ़ी तपिश, प्याऊ भी उगल रहे गर्म पानी—जनजीवन प्रभावित
सांची,,,इन दिनों क्षेत्र में गर्मी ने अपना रौद्र रूप धारण कर लिया है। तापमान में लगातार हो रही बढ़ोतरी के चलते लोग छांव और ठंडे पानी की तलाश में इधर-उधर भटकते नजर आ रहे हैं। दोपहर के समय सड़कों और सार्वजनिक स्थलों पर गर्मी का असर साफ दिखाई दे रहा है।
जानकारी के अनुसार, मौसम की गर्माहट अब तेज़ी से बढ़ते हुए चरम की ओर पहुंच रही है। इसका सीधा असर आमजन के दैनिक जीवन पर पड़ रहा है। लोग जगह-जगह ठंडे पानी की तलाश करते दिखाई दे रहे हैं, लेकिन व्यवस्थाएं पर्याप्त नहीं हैं।
हालांकि नगर परिषद अध्यक्ष के प्रयासों से कुछ स्थानों पर ठंडे पानी की अस्थायी व्यवस्था कराई गई है, लेकिन नगर में पहले से बने स्थायी प्याऊ भी राहत देने में नाकाम साबित हो रहे हैं। कई स्थानों पर ये प्याऊ ठंडे की बजाय गर्म पानी दे रहे हैं, जिससे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
गर्मी की मार के पीछे एक बड़ा कारण नगर की खत्म होती हरियाली भी है। कभी घने पेड़ों और हरियाली से आच्छादित रहने वाला सांची अब धीरे-धीरे कंक्रीट के ढांचे में बदलता जा रहा है। राष्ट्रीय राजमार्ग और अन्य विकास कार्यों के दौरान बड़ी संख्या में वर्षों पुराने छायादार और फलदार पेड़ों की कटाई कर दी गई।
स्थानीय लोगों ने उस समय पेड़ों को बचाने के प्रयास भी किए थे और विरोध भी दर्ज कराया था। तब निर्माण एजेंसी द्वारा अन्य स्थानों पर बड़े पैमाने पर पौधारोपण का आश्वासन दिया गया था, लेकिन कार्य पूर्ण होते ही यह वादा भी अधूरा रह गया।
परिणामस्वरूप आज स्थिति यह है कि नगर में छांव का संकट गहराता जा रहा है। इसका असर न केवल स्थानीय नागरिकों पर पड़ रहा है, बल्कि यहां आने वाले देशी-विदेशी पर्यटक भी तपती धूप और असुविधाओं से जूझने को मजबूर हैं।
एक ओर आसमान से बरसती तेज धूप और दूसरी ओर गर्मी उगलती जमीन ने लोगों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। नगर में ऑक्सीजन और हरियाली की कमी भी अब महसूस की जाने लगी है, जो आने वाले समय के लिए गंभीर संकेत है।
बढ़ती गर्मी और घटती हरियाली ने सांची में जीवन को कठिन बना दिया है—अब जरूरत है ठोस और स्थायी समाधान की।





