रिपोर्ट: नज़ीर अली | लाइव खबर इंडिया
विदिशा। मध्य प्रदेश के विदिशा मेडिकल कॉलेज में जूनियर डॉक्टरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल के चलते स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हो गई हैं। स्टाइपेंड बढ़ाने सहित विभिन्न मांगों को लेकर डॉक्टरों ने काम बंद कर दिया है। इसका सबसे अधिक असर ओपीडी, इमरजेंसी, लेबर रूम और प्रसूति वार्ड में देखने को मिल रहा है, जहां इलाज के लिए पहुंचे मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
जूनियर डॉक्टरों का कहना है कि वे 9 जुलाई से लगातार अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। इस दौरान उन्होंने मेडिकल कॉलेज के डीन, मेडिकल सुपरिंटेंडेंट (एमएस) और जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर मुख्यमंत्री तक अपनी मांग पहुंचाने की अपील की, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
डॉक्टरों की प्रमुख मांग स्टाइपेंड को वर्तमान 14,377 रुपये से बढ़ाकर 30,000 रुपये किए जाने की है। उनका कहना है कि कोरोना महामारी के दौरान उन्होंने पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ सेवाएं दीं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें सम्मानजनक स्टाइपेंड नहीं मिल रहा। उनका दावा है कि मौजूदा राशि में दैनिक खर्च और अन्य आवश्यकताओं का निर्वाह करना कठिन हो गया है।
31 जुलाई से शुरू हुई इस अनिश्चितकालीन हड़ताल का सीधा असर मेडिकल कॉलेज की स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ा है। प्रतिदिन एक हजार से अधिक मरीज इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज पहुंचते हैं, लेकिन जूनियर डॉक्टरों के काम बंद करने से इलाज की व्यवस्था प्रभावित हो रही है और मरीजों को लंबा इंतजार करना पड़ रहा है।
जूनियर डॉक्टरों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। फिलहाल सभी की निगाहें शासन और स्वास्थ्य विभाग के अगले कदम पर टिकी हैं। यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो हड़ताल लंबी खिंचने से मरीजों की परेशानियां और बढ़ सकती हैं।





