नसीमखान
सांची,,, विश्व धरोहर स्थल सांची एक बार फिर वीआईपी आगमन की तैयारियों के चलते संवरने लगा है। आगामी 8 अगस्त को जी-20 देशों के प्रतिनिधियों के संभावित आगमन को देखते हुए नगर में व्यापक सौंदर्यीकरण और स्वच्छता अभियान चलाया जा रहा है। स्टेशन रोड से लेकर स्तूप मार्ग तक फुटपाथों का नवीनीकरण, टाइल्स बिछाने, रंग-रोगन, पुताई तथा सड़क सुधार के कार्य युद्धस्तर पर जारी हैं। इन तैयारियों पर करोड़ों रुपये खर्च होने की संभावना जताई जा रही है।
जानकारी के अनुसार, स्टेशन रोड पर वर्षों से फल-फ्रूट बेचकर आजीविका चलाने वाले विक्रेताओं को सर्विस रोड पर स्थानांतरित कर दिया गया है। वहीं स्तूप मार्ग पर व्यवसाय करने वाले हाथठेला संचालकों को भी हटाया जा चुका है, ताकि मार्ग व्यवस्थित और आकर्षक दिखाई दे।
नगर के फुटपाथों पर लगाए गए सजावटी लैंप, जो लंबे समय से टूटे-फूटे और बंद पड़े थे तथा जिनकी विद्युत केबलें भी क्षतिग्रस्त हो चुकी थीं, उन्हें फिर से दुरुस्त किया जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इन व्यवस्थाओं पर पहले भी लाखों रुपये खर्च किए जा चुके हैं, लेकिन नियमित रखरखाव के अभाव में वे कुछ ही समय में निष्प्रभावी हो गईं। अब एक बार फिर अतिथियों के स्वागत के लिए बड़े पैमाने पर खर्च किया जा रहा है।
पर्यटन विकास विभाग द्वारा जम्बूद्वीप पार्क को भी आकर्षक स्वरूप देने के लिए दिन-रात कार्य कराया जा रहा है। इसके साथ ही सड़कों की मरम्मत, विशेष सफाई अभियान तथा लंबे समय से बंद पड़ी कई स्ट्रीट लाइटों को भी चालू किया जा रहा है। हालांकि नगरवासियों का कहना है कि यह विशेष ध्यान मुख्यतः स्टेशन रोड और स्तूप मार्ग तक ही सीमित दिखाई देता है, जबकि नगर के भीतरी क्षेत्रों में अब भी मूलभूत सुविधाओं और स्वच्छता की स्थिति संतोषजनक नहीं है।
करीब ढाई हजार वर्ष पुराने इतिहास को समेटे सांची विश्व प्रसिद्ध बौद्ध धरोहर है। यहां स्थित महान स्तूप, प्राचीन तोरण द्वार, पुरातत्व संग्रहालय तथा सम्राट अशोक से जुड़ी ऐतिहासिक विरासत विश्वभर के पर्यटकों और बौद्ध धर्मावलंबियों को आकर्षित करती है। यही वह भूमि है, जहां से सम्राट अशोक ने कलिंग युद्ध के बाद शांति और अहिंसा का संदेश विश्व को दिया था। इसी कारण सांची को ‘शांति का टापू’ भी कहा जाता है।
हर वर्ष हजारों देशी-विदेशी पर्यटक, बौद्ध भिक्षु तथा विशिष्ट अतिथि यहां पहुंचते हैं। उनकी सुविधा के लिए महाबोधि सोसायटी सहित विभिन्न संस्थाएं भी व्यवस्थाओं में सहयोग करती हैं।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जब भी कोई बड़ा आयोजन या विदेशी प्रतिनिधिमंडल सांची आता है, तब नगर की सूरत बदलने पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन आयोजन समाप्त होते ही अधिकांश व्यवस्थाएं फिर उपेक्षा का शिकार हो जाती हैं। लोगों का मानना है कि यदि यही व्यवस्थाएं वर्षभर नियमित रूप से बनी रहें, तो सांची की विश्वस्तरीय पहचान और अधिक सशक्त हो सकती है। विश्व धरोहर की गरिमा तभी सार्थक होगी, जब सांची केवल अतिथियों के स्वागत में नहीं, बल्कि वर्षभर सुव्यवस्थित और सुंदर दिखाई दे।





