रिपोर्ट: नसीम खान |Live khabar india
रायसेन, मध्य प्रदेश: (सांची) सांस्कृतिक कूटनीति के एक बड़े प्रतीक के रूप में, ब्रिक्स (BRICS) देशों से आए अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों और अन्य डेलिगेट्स ने शनिवार को मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में स्थित विश्व प्रसिद्ध यूनेस्को (UNESCO) धरोहर स्थल सांची का दौरा किया। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य वैश्विक मंच पर भारत की प्राचीन बौद्ध विरासत, आध्यात्मिक इतिहास और बेजोड़ स्थापत्य कला की भव्यता को प्रदर्शित करना था।
भारतीय संस्कृति के अनुरूप भव्य स्वागत
सांची पहुंचने पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडल का बेहद गर्मजोशी और पारंपरिक भारतीय शैली में स्वागत किया गया। रायसेन कलेक्टर श्री अरुण कुमार विश्वकर्मा की अगवानी में सभी मेहमानों को ‘तिलक’ लगाकर और सूत की माला पहनाकर ‘अतिथि देवो भव’ की भावना के साथ अगवानी की गई।

इस उच्च स्तरीय दल में ब्राजील, चीन, दक्षिण अफ्रीका, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), इंडोनेशिया और रूस सहित कुल 10 सदस्य देशों के 42 प्रतिनिधि शामिल रहे।
केंद्रीय संस्कृति मंत्री और राज्य मंत्री की मौजूदगी में भ्रमण
इस खास सांस्कृतिक दौरे का नेतृत्व देश के केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने किया। केंद्रीय मंत्री और अंतरराष्ट्रीय मेहमानों के साथ मध्य प्रदेश शासन के संस्कृति राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री धर्मेंद्र लोधी भी पूरे समय मौजूद रहे।

केंद्रीय और राज्य नेतृत्व की एक साथ उपस्थिति यह दर्शाती है कि सरकार मध्य प्रदेश को वैश्विक सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पर्यटन के एक प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
जम्बू द्वीप पार्क और म्यूजियम का अवलोकन
अपने विस्तृत दौरे के दौरान ब्रिक्स देशों के प्रतिनिधियों ने सांची ऐतिहासिक परिसर के विभिन्न महत्वपूर्ण हिस्सों को देखा और उनके इतिहास को समझा:

सांची के ऐतिहासिक स्तूप:सम्राट अशोक द्वारा निर्मित महान स्तूप और उसके चारों ओर बने तोरण द्वारों पर उकेरी गई जातक कथाओं और कलाकृतियों को देखकर विदेशी मेहमान मंत्रमुग्ध हो गए।
जम्बू द्वीप पार्क:डेलिगेट्स ने बौद्ध दर्शन और मान्यताओं पर आधारित इस खूबसूरत थीम पार्क का भ्रमण किया, जो शांति और हरियाली से सराबोर है।
सांची पुरातत्व संग्रहालय: डेलिगेट्स ने म्यूजियम में रखीं ईसा पूर्व तीसरी शताब्दी की दुर्लभ मूर्तियों, अवशेषों और प्राचीन कलाकृतियों को बहुत करीब से देखा।

वैश्विक सांस्कृतिक संबंधों को मिलेगी मजबूती
ब्रिक्स समूह के विस्तार के बाद यह दौरा सदस्य देशों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने में बेहद अहम भूमिका निभाएगा। सांची की वास्तुकला और भगवान बुद्ध के शांति के संदेश को दुनिया के सामने रखकर भारत ने एक बार फिर अपनी ‘सॉफ्ट पावर’ (सांस्कृतिक ताकत) का लोहा मनवाया है। इस यात्रा से सदस्य देशों के बीच आपसी समझ और ऐतिहासिक धरोहरों के प्रति सम्मान और गहरा होगा।





