बिलासपुर में आयोजित 47 वां राउत नाचा महोउत्सव मे पारंपरिक वेशभूषण में दिखे मुख्यमंत्री विष्णु देव सायं।

जांजगीर-चांपा शक्ति छत्तीसगढ़।
संवाददाता, दिलेश्वर चौहान
,
राउत नाचा परंपरा और सिंगर का अद्भुत संगम है।
इस नृत्य में मुख्यमंत्री विष्णु देव सायं पारंपरिक वेशभूषा, जलाजल कौड़ी ,से सजावट।
सर पर पगड़ी ,में सुशोभित होते फूलों की लरी, एक हाथ में लाठी और एक हाथ में ढाल लिए मुख्यमंत्री नाचते नजर आए।
छत्तीसगढ़ का यह राउत नाचा दिवाली शुरू होते ही घरों घर जाकर उनके आंगन में नाच करते हैं ।
और जोश से भरा दोहा पुकार कर घर के मालिक को और घर वालों को दुआ देते हैं।
और विदाई लेकर दूसरे यहां चले जाते हैं।
यह परंपरा धान कटाई के बाद शुरू हो जाता है, खुशियोंऔर उमंग का परंपरा है।
पारंपरिक नाच में गड़वा बाजा का महत्वपूर्ण योगदान रहता है। गड़वा बाजा के बगैर राउत नाचा अधूरा है।
इस नाचा सिर्फ गड़वा बाजा की धुन पर हि सोभीत होता है।
अस्त्र ,शास्त्र ,लाठी ,ढाल,
और सिंगर का अद्भुत संगम देखने को मिलता है ।
इस नाचा में बीच-बीच में दोहा,( हाना) पुकार कर नाच करते हैं।
तरह-तरह के,हाना, बहुत ही रोमांचक सुनने को मिलता है।
सदियों से चली आ रही इस नाचा का परंपरा दिवाली से शुरू हो जाता है, मांग पुस महीने तक चलता है।
गढ़वा बाजा जिसमें ढोल ,निशान, टीमकी, मोहरी, झुमका ,जैसे वाद्य यंत्र से दर्शन भी झूमने लगते हैं ।
ढोल की थाप पर जब नित्य करते हैं तो जमीन दहल जाता है ।
इस नाच का रोमांचक और तब बढ़ जाता है,😭 जब गड़वा बाजा का भरनी तार बजाता हैं।
और राउत,लाठी (चलाते)भांजते हैं । इसका रोमान्चऔर बढ़ जाता है।
यह बहुत ही रोमांचक छत्तीसगढ़ के परंपरा में खेती किसानी से फुर्सत होकर खुशियां मना कर पीढ़ी दर पीढ़ी परंपरा को निभाते चले आ रहे हैं।
राउत नाचा और गड़वा बाजा महत्वपूर्ण अंग है।
(राउत)यादव और (गड़वा )गांड़ समाज में चोली दामन का साथ है।
मुख्यमंत्री ने इस रावत नित्य में भाग लेकर कहा कि राउत नाचा के शौर्य, गौरव ,और समृद्धि ,सांस्कृतिक परंपरा का प्रतीक है।
गड़वा बाजा के साथ राउत नाचा का 47 व महोत्सव में छत्तीसगढ़ के जनता को सुख समृद्धि और पूर्वजों के परंपरा को पीढ़ी दर पीढ़ी जिंदा रखने के लिए अति आवश्यक है।

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