नसीमखान
सांची ,, ऐतिहासिक, पर्यटन और बौद्ध धरोहर के लिए देश-दुनिया में पहचान बना चुका सांची नगर आज पानी और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहा है। एक ओर शासन और प्रशासन द्वारा मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के दावे किए जाते हैं, तो दूसरी ओर जमीनी हकीकत इससे कोसों दूर है।
जानकारी के अनुसार नगर परिषद प्रशासन और विद्युत वितरण कंपनी की लापरवाही के चलते नगरवासियों को बिजली-पानी के संकट से रोज जूझना पड़ रहा है। स्थिति यह हो चुकी है कि जब बिजली आती है तब पानी नहीं आता और जब पानी आता है तो बिजली गुल हो जाती है। बिजली और पानी जैसे जीवन के दो जरूरी तत्व आज एक-दूसरे के पूरक नहीं बल्कि विकल्प बन गए हैं—यानी एक होगा तो दूसरा नहीं।
स्थानीय निवासियों की मानें तो बार-बार शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी न तो समस्या के समाधान की पहल कर रहे हैं और न ही फोन उठाने की जहमत। कई बार तो संबंधित अधिकारियों के मोबाइल स्विच ऑफ रहते हैं, जिससे नागरिकों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
हैरानी की बात यह है कि जहां एक ओर सुविधाएं नदारद हैं, वहीं दोनों ही विभाग उपभोक्ताओं से मनमानी राशि वसूलने से बाज नहीं आ रहे। उपभोक्ताओं को नियमित बिल तो थमाए जा रहे हैं, लेकिन सुविधा के नाम पर शून्य। शासन और प्रशासन दोनों ही इस समस्या पर चुप्पी साधे हुए हैं।
नगरवासियों की मांग है कि सांची जैसे ऐतिहासिक स्थल पर बुनियादी सुविधाओं की प्राथमिकता के साथ पूर्ति होनी चाहिए। अन्यथा यह संकट पर्यटन और जनजीवन दोनों पर भारी पड़ सकता है।शासन प्रशासन की मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की धींगे कोरी साबित हो रही हैं ।जिम्मेदार अपनी मनमानी पर उतारू हो चुके है इन पर शासन प्रशासन की लगाम पूरी तरह खत्म हो चुकी हैं ।






