नसीमखान
सांची,,सांची के आसपास ग्रामीण क्षेत्रों में ईंट भट्ठों का कारोबार धड़ल्ले से जारी है, लेकिन संबंधित विभागों को इसकी भनक तक नहीं लग रही है या फिर वे जानबूझकर आंखें मूंदे हुए हैं। इस अवैध व्यापार में संलिप्त लोग बेधड़क होकर अपने काम को अंजाम दे रहे हैं।
इन ईंट भट्ठों की वजह से न सिर्फ जंगलों के पेड़-पौधे बलि चढ़ रहे हैं, बल्कि खेतों की उपजाऊ जमीन भी बर्बाद हो रही है। बताया जाता है कि अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग के लोगों को सरकार द्वारा मकान निर्माण के लिए जो छूट दी गई थी, उसी का दुरुपयोग कर इन ईंट भट्ठों को खुलेआम चलाया जा रहा है।
अवैध रूप से संचालित इन भट्टों से मनमाने दामों पर ईंटें बेची जा रही हैं। यह व्यापार वर्षों से फल-फूल रहा है और स्थानीय प्रशासन, वन विभाग, खनिज विभाग तथा राजस्व विभाग की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
गंभीर बात यह है कि कई भट्ठे वन विभाग की भूमि के पास ही लगे हैं। जब इन भट्टों में ईंटें पकाई जाती हैं, तब जंगल के पेड़-पौधे झुलस जाते हैं और हरियाली तहस-नहस हो जाती है। इसके अलावा, भट्टों में इस्तेमाल होने वाली मिट्टी (भसुआ) भी वनभूमि से अवैध रूप से निकाली जाती है।
शहर एवं आसपास के बड़े सरकारी भवनों में इन्हीं अवैध भट्टों से ईंटों की आपूर्ति की जाती है। इस व्यापक स्तर पर चल रहे अवैध व्यापार के कारण सरकार को करोड़ों रुपए का राजस्व नुकसान हो रहा है। इसका सीधा असर गरीबों पर पड़ता है, जिनका सस्ता मकान बनाने का सपना टूटता जा रहा है।
प्रशासन की अनदेखी और मिलीभगत की आशंका को नकारा नहीं जा सकता। अब देखना यह है कि जिम्मेदार विभाग इस ओर कब जागते हैं और अवैध ईंट भट्ठों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कब होती है।






