रिपोर्टर @दीपक कुमार गर्ग | शहडोल, मध्य प्रदेश
शहडोल जिले की जनपद पंचायत जयसिंहनगर अंतर्गत ग्राम पंचायत रिमार एक बार फिर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों की चपेट में आ गई है। इस बार मामला मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की 9 जून को ब्यौहारी में आयोजित कोल जनजाति सम्मेलन एवं रैली से जुड़ा है, जहाँ पंचायत के जिम्मेदारों द्वारा हजारों रुपये की शासकीय राशि का गबन किए जाने की बात सामने आ रही है।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार ग्राम पंचायत रिमार के सरपंच और सचिव द्वारा रैली कार्यक्रम में भागीदारी के नाम पर लगभग 46,000 रुपये का फर्जी बिल लगाया गया। खास बात यह है कि गांव से केवल दो बोलेरो वाहन ही रैली में शामिल हुए थे, जिनमें कुल मिलाकर 10 से 15 ग्रामीण ही मौजूद थे।
फर्जी बिल में दर्ज आंकड़े चौंकाने वाले
जानकारी के अनुसार पंचायत की ओर से 400 लंच पैकेट और 500 पानी की बोतलों के भुगतान का दावा किया गया है। सवाल यह उठता है कि जब रैली में इतनी कम संख्या में लोग शामिल हुए, तो फिर ये सैकड़ों लंच और पानी किसने खाए-पिए?
ग्रामीणों का कहना है कि यह सीधा-सीधा शासकीय राशि के दुरुपयोग का मामला है, जिसे पंचायत के जिम्मेदारों ने अपनी जेब भरने के उद्देश्य से अंजाम दिया है।
जांच या फिर समझौता?
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या जनपद और जिला प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेकर निष्पक्ष जांच करेगा? या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह लेन-देन और प्रभाव की भेंट चढ़ जाएगा?
ग्राम स्तर पर इस तरह के भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए कड़े कदम उठाने की आवश्यकता है, ताकि जनता की गाढ़ी कमाई से चलने वाली योजनाओं का वास्तविक लाभ पात्रों तक पहुँच सके।
यदि प्रशासन चाहे तो दस्तावेज़ों की जांच व मौके की वस्तुस्थिति से आसानी से यह स्पष्ट किया जा सकता है कि रैली में वास्तविक रूप से कितने लोग शामिल हुए और व्यय कितना हुआ।






